vvv

कोलकाता, 16 अक्टूबर।

पश्चिम बंगाल में हर्षोल्लास के साथ मनाए जा रहे दुर्गा पूजा उत्सव के बीच राज्य के सूचना एवं संस्कृति विभाग की ओर से देवी दुर्गा सम्मान 2026 के विजेताओं की घोषणा कर दी गई है। शुक्रवार को कोलकाता के नंदन परिसर में आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में पुरस्कृत पूजा कमेटियों के नामों का ऐलान किया गया।

संवाददाता सम्मेलन में राज्य की सूचना एवं संस्कृति राज्य मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती, विधायक रुद्रनील घोष, दोला कुंडू मंडल, पद्मश्री नारायण चक्रवर्ती, कौशिक बसाक और डॉ. राकेश कुमार पांडे जैसे गणमान्य लोग उपस्थित थे। इस वर्ष पुरस्कारों के लिए गठित निर्णायक मंडल में सरूप प्रसाद घोष, रेशमी दासगुप्ता, डॉ. राकेश पांडे, दोलन कुंडू मंडल और रुद्रनील घोष शामिल रहे।

पुरस्कार विजेताओं का विवरण साझा करते हुए बताया गया कि सर्वश्रेष्ठ पूजा यानी सर्वोच्च सम्मान संतोष मित्रा स्क्वायर, वृंदावन गार्डन दुर्गा पूजा समिति और चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव समिति को दिया गया है।

सर्वश्रेष्ठ प्रतिमा के लिए मुदियाली क्लब, टाला बारोवारी दुर्गोत्सव समिति, बेहाला अरुणोदय समिति और अहीरीटोला सार्वजनिक को चुना गया है।

सर्वश्रेष्ठ आलोकसज्जा का पुरस्कार संतोषपुर एवेन्यू साउथ, बकुलबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव और शिवमंदिर सार्वजनिक दुर्गोत्सव ने जीता है। सर्वश्रेष्ठ मंडप का सम्मान खिदिरपुर 25 पल्ली क्लब और आमरा कजन कल्याण समिति को मिला है।

अन्य श्रेणियों में, सर्वश्रेष्ठ सामाजिक जागरूकता के लिए काशी बोस लेन दुर्गा पूजा समिति, बालीगंज कल्चरल एसोसिएशन, चक्रबेड़िया सार्वजनिक और अजेय संहति को पुरस्कृत किया गया है।

सर्वश्रेष्ठ पर्यावरण अनुकूल पूजा का सम्मान नलिन सरकार स्ट्रीट सार्वजनिक दुर्गोत्सव, पार्क स्ट्रीट स्थित एलन पार्क और राजडांगा नव उदय संघ को दिया गया है। इसके अलावा विशेष पुरस्कार बी.जी. लाइन्स आवासीय दुर्गा पूजा कमेटी, श्याम स्क्वायर, ठाकुरपुकुर स्टेट बैंक सार्वजनिक और समाजसेबी संघ के खाते में गया है।

सर्वश्रेष्ठ सम्मान प्राप्त करने वाली पूजा कमेटियों को पुरस्कार स्वरूप एक लाख रुपये का चेक और एक स्मृति चिह्न भेंट किया जाएगा। इन पुरस्कारों का वितरण आगामी 26 अक्टूबर को मिलन मेला प्रांगण में आयोजित होने वाले एक भव्य समारोह में किया जाएगा।

इस अवसर पर मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने कहा कि इस वर्ष मुख्यमंत्री के हाथों एक भव्य आयोजन के जरिए देवी के आगमन का शंखनाद किया गया था। पश्चिम बंगाल की पहचान ही दुर्गोत्सव से है, इसलिए इस समृद्ध संस्कृति और परंपरा को आगे ले जाना सरकार का पुनीत कर्तव्य है। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि आने वाले वर्षों में दुर्गा पूजा को और अधिक वृहद और भव्य पैमाने पर आयोजित करने की सरकारी योजना तैयार की जा रही है।