कोलकाता, 22 सितंबर। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद जबरन वसूली और धमकी देने के एक मामले में पूछताछ के लिए मंगलवार को पश्चिम बंगाल अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के समक्ष पेश हुए। भवानी भवन स्थित राज्य जांच एजेंसी के मुख्यालय के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे।
सांसद ने दावा किया कि उन्हें विशुद्ध रूप से राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है और जानबूझकर परेशान करने की कोशिश की जा रही है। यह मामला एक व्यवसायी की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता का आरोप है कि मई 2025 में उसे दुर्गापुर स्थित सांसद के बंगले पर बुलाया गया था, जहां उनके एक सहयोगी ने कथित तौर पर 15 लाख रुपये की रंगदारी मांगी थी।
व्यवसायी ने यह भी आरोप लगाया था कि पैसे नहीं देने पर रानीगंज में उसके रसोई गैस के व्यवसाय को बंद कराने की धमकी दी गई थी। गौरतलब है कि इस कथित घटना के लगभग 15 महीने बाद पुलिस में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
यह मामला जब कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचा, तो जांच एजेंसी ने आरोपों से जुड़े कुछ ऑडियो क्लिप अदालत के समक्ष पेश किए। हालांकि, अदालत ने अपने अवलोकन में पाया कि पेश की गई सामग्री प्रथम दृष्टया आरोपों के लिए कोई मजबूत आधार प्रदान नहीं करती है। इसके बाद अदालत ने आजाद को छह महीने के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान करते हुए उन्हें जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया था। सांसद ने भी अदालत में अपनी हवाई यात्रा के रिकॉर्ड जमा करते हुए यह साबित किया था कि ये घटना वाले दिन वह दुर्गापुर में मौजूद ही नहीं थे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया था कि यदि एजेंसी उन्हें पूछताछ के लिए बुलाना चाहती है, तो उन्हें कम से कम सात दिन पहले नोटिस देना अनिवार्य होगा।
पेशी के दौरान सांसद ने दोहराया कि वह जांच अधिकारियों के सामने सभी प्रामाणिक तथ्य रखेंगे। दूसरी तरफ, जांच एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अदालत के निर्देशों के सख्त अनुपालन में ही पूछताछ की जा रही है और जांच प्रक्रिया के तहत सभी प्रासंगिक सबूतों और सामग्रियों का गहनता से परीक्षण किया जाएगा।
