कूचबिहार, 12 जुलाई । तृणमूल कांग्रेस के कूचबिहार जिले के पूर्व जिलाध्यक्ष रवींद्रनाथ घोष ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर ऋतब्रत बनर्जी गुट का दामन थाम लिया है। पार्टी बदलते ही उन्हें कूचबिहार का जिलाध्यक्ष बना दिया गया है। इस घटनाक्रम के बाद जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
ऋतब्रत गुट में शामिल होने के बाद रवींद्रनाथ घोष ने ममता बनर्जी के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि मैंने ममता बनर्जी का साथ नहीं छोड़ा, उन्होंने मुझे छोड़ दिया।
उन्होंने बताया कि 1998 से 2019 तक लगातार 22 वर्षों तक वह जिलाध्यक्ष रहे, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में हार के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। 2021 के बाद से उन्हें पार्टी में कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई और नए कार्यकर्ताओं द्वारा अपमानित किए जाने के बावजूद नेतृत्व ने कोई कदम नहीं उठाया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यकाल खत्म होने से पहले ही उन्हें नगरपालिका चेयरमैन पद से हटा दिया गया। हालांकि, उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के प्रति उनका सम्मान हमेशा बना रहेगा।
राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद कूचबिहार में तृणमूल की स्थिति कमजोर होती नजर आ रही है। जिला कार्यालय लंबे समय से बंद पड़ा है और पार्टी के कई वरिष्ठ नेता या तो गायब हैं या सक्रिय नहीं है। ऐसी स्थिति में पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे है।
उल्लेखनीय है कि शनिवार को कोलकाता में हुई बैठक के बाद ऋतब्रत गुट ने रवींद्रनाथ घोष को आधिकारिक रूप से जिलाध्यक्ष घोषित किया। इस बीच केंद्रीय मंत्री निशीथ प्रमाणिक ने कहा कि रवींद्रनाथ घोष तृणमूल के पुराने कार्यकर्ता रहे है, लेकिन राजनीतिक लड़ाई पहले की तरह जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी को जिलाध्यक्ष बनाना पार्टी का आंतरिक मामला है।
अब सवाल यह है कि मौजूदा हालात में जब जनता में नाराजगी देखी जा रही है, क्या 70 वर्ष से अधिक उम्र के रवींद्रनाथ घोष फिर से संगठन को मजबूत कर पाएंगे। इस पर उन्होंने कहा कि वह फिलहाल अस्वस्थ हैं, लेकिन जल्द ठीक होकर पूरी ताकत से काम शुरू करेंगे और संगठन को फिर से खड़ा करने का प्रयास करेंगे।
