रांची/रामगढ़, 4 अगस्त। झारखंड आंदोलन के महानायक, पद्म भूषण से सम्मानित दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर मंगलवार को पूरे राज्य में श्रद्धांजलि सभाओं, स्मरण कार्यक्रमों और सामाजिक आयोजनों का आयोजन किया गया। रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड स्थित उनके पैतृक गांव नेमरा में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पूरे परिवार के साथ शामिल हुए, जहां दिशोम गुरु की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया गया। वहीं रांची, खूंटी, पूर्वी सिंहभूम, चतरा सहित विभिन्न जिलों में राजनीतिक दलों, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर उनके संघर्ष और योगदान को याद किया।
पद्मभूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि कार्यक्रम उनके पैतृक गांव रामगढ़ जिले के गोला प्रखंड अंतर्गत नेमरा गांव में आयोजित की गई। गांव में सोना सोबरन मेमोरियल हाई स्कूल परिसर के समीप स्थापित दिशोम गुरु की आदमकद प्रतिमा का अनावरण मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी माता रूपी सोरेन से बटन दबवाकर कराया। इसके बाद मुख्यमंत्री और परिवार के सदस्यों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस मौके पर उनके साथ उनकी पत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन, वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर, मंत्री योगेंद्र प्रसाद, दीपिका पांडे सिंह, शिल्पी नेहा तिर्की, संजय प्रसाद यादव, राज्यसभा सांसद डॉ महुआ मांझी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विधायक ममता देवी, उमाकांत रजक, जय मंगल सिंह उर्फ अनूप सिंह, अमित महतो, पूर्व मंत्री बेबी देवी आदि मौजूद थे।
संघर्षों से ही खत्म होगा शोषण, आदिवासियों की एकता ही उनकी ताकत : मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पिता शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि जंगलों में रहने वाले आदिवासियों की एकता ही उनकी ताकत है। शोषण के खिलाफ संघर्ष और आंदोलन ही एक मात्र रास्ता है। यह रास्ता दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने हमें दिखाया था। आज भी उनके संदेश हमें मार्गदर्शन देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन मेरे और पूरे परिवार के लिए बेहद गम से भरा है। यह सिर्फ मेरे लिए ही नहीं बल्कि देश और राज्य के उन सभी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों के लिए पीड़ादायक दिन है। उनकी पहली पुण्यतिथि पर नेमरा गांव से सटे लुकैयाटांड़ में सोना सोबरन हाई स्कूल परिसर में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा अनावरण किया गया है। स्कूल परिसर में प्रतिमा का उद्देश्य यह है कि हमारे साथ-साथ हमारे आने वाली पीढ़ी भी हमारे संघर्षों और शहादतों को याद रखें। हमारे इतिहास उनके दिलों में जिंदा रहे, ताकि उनका भविष्य संवरे और आने वाली चुनौतियों को वह सुलझा सकें।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मौके पर अपने दादा सोबरन मांझी को भी याद किया। उन्होंने कहा कि जिस जगह पर अपने पिता की प्रतिमा उन्होंने स्थापित की है, उसी लुकैयाटांड़ के जंगल में उनके दादा का भी समाधि स्थल है। असामाजिक तत्वों ने बेरहमी से उनकी हत्या कर दी थी। शोषण करने वालों ने उस समय जो कांड किया था, आज भी वैसी घटनाएं सुनने को मिलती हैं। इससे स्पष्ट है कि शोषण करने वालों के चेहरे बदल गए हैं, लेकिन फितरत वही है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि नया दौर नई पीढ़ी का है। यह नई पीढ़ी पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ रही है। लेकिन इसमें अच्छाई और बुराई दोनों शामिल हैं। नई पीढ़ी को सही रास्ता दिखाना होगा, ताकि उनका भविष्य उज्जवल हो सके। गुरुजी के आदर्श आज पूरे राज्य को संदेश दे रहे हैं। आज के दिन उन्हें पूरे राज्य में याद किया जा रहा है।
हेमंत सोरेन ने कहा कि आज हमें मौका मिला है कि शिबू सोरेन ने जिस राज्य की स्थापना की थी उसे सजाने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है और उनका प्रयास है कि उनकी जिम्मेदार सरकार अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचे। सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए और जनता की आवाज बेहद आसानी से सरकार तक पहुंचे इसकी व्यवस्था दुरुस्त की जाएगी।
इस मौके पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड का हर कोना वीरों से भरा पड़ा है। उनके पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई लड़ी। अपने हक और अधिकारों के लिए संघर्ष किया। उन्हीं वीरों के वंशज आज इस धरती पर मौजूद हैं। हमें अपनों से नहीं बल्कि दुश्मनों से लड़ना है। हमें अलग करने और एकता को तोड़ने के लिए कई ताकतें लगी हैं। लेकिन उन्हें सफल नहीं होने देना है।

मुख्यमंत्री ने अर्पित की श्रद्धांजलि
हेमन्त सोरेन ने दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर मोरहाबादी स्थित उनके आवास पहुंचकर उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर दिवंगत दिशोम गुरु की धर्मपत्नी रूपी सोरेन, विधायक कल्पना सोरेन समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने भी उनकी तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके संघर्षपूर्ण जीवन, योगदान तथा आदर्शों को याद किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बाबा (शिबू सोरेन) आज भौतिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष, विचार और योगदान सदैव अमर रहेगा। उन्होंने अपना जीवन झारखंड के मूलवासियों, आदिवासियों, वंचितों और शोषितों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके उत्थान के लिए समर्पित किया। उनके सपनों को साकार करना और उनके आदर्शों के अनुरूप राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने झारखंड आंदोलन के सभी वीर शहीदों को भी श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
नेवरी रिंग रोड का गोलचक्कर होगा ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक‘, 14 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा
झारखंड मुक्ति मोर्चा रांची की ओर से दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर नेवरी रिंग रोड स्थित चौक पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान उनके चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
कार्यक्रम में घोषणा की गई कि नेवरी रिंग रोड स्थित गोलचक्कर का नाम अब ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन चौक’ होगा। साथ ही यहां दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा स्थापित कर चौक का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
श्रद्धांजलि सभा में झामुमो के केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय, केंद्रीय महासचिव एवं प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य तथा राज्यसभा सांसद डॉ. महुआ माजी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
विनोद कुमार पांडेय ने इस मौके पर कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन झारखंड के स्वाभिमान, अस्मिता और पहचान के प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि उनकी जयंती के अवसर पर प्रस्तावित प्रतिमा का भव्य अनावरण किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके संघर्ष और योगदान से प्रेरणा ले सकें।
झामुमो रांची जिला संयोजक प्रमुख मुस्ताक आलम के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में स्थानीय लोगों को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसके साथ ही जरूरतमंदों के बीच साड़ी और लूंगी का वितरण भी किया गया।
कार्यक्रम में सुप्रियो भट्टाचार्य, अंतु तिर्की, महावीर विश्वकर्मा, कलाम आजाद, कुदूस अंसारी, मंटू लाला, आदिल इमाम, विलियम रिचर्ड लकड़ा, तालकेश्वर महतो, कांके प्रखंड अध्यक्ष नवीन तिर्की, ओरमांझी प्रखंड अध्यक्ष नागेश्वर महतो, नरेश यादव, बुंडू प्रखंड अध्यक्ष कोलेश्वर मुंडा, नामकुम प्रखंड अध्यक्ष चामू बेक सहित बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता और स्थानीय लोग उपस्थित थे।

कांग्रेस ने दी श्रद्धांजलि
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिशोम गुरु के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर केशव महतो कमलेश ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का संपूर्ण जीवन झारखंड की पहचान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा, आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों तथा गरीब, किसान, मजदूर और वंचित वर्ग के सम्मान की लड़ाई को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि उनका संघर्ष केवल अलग झारखंड राज्य के निर्माण तक सीमित नहीं था, बल्कि वे ऐसे राज्य का सपना देखते थे, जहां प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान, न्याय और विकास के समान अवसर उपलब्ध हों।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिशोम गुरु के आदर्श सभी के लिए प्रेरणास्रोत हैं और उनके बताए मार्ग पर चलना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित अन्य नेताओं ने भी दिशोम गुरु के जीवन, संघर्ष और झारखंड निर्माण में उनके योगदान को स्मरण किया। कार्यक्रम में रविन्द्र सिंह, सतीश पॉल मुंजनी, प्रदीप तुलस्यान, बिनय सिन्हा दीपू, कुमार गौरव, राकेश सिन्हा, किशोर शाहदेव, राजीव रंजन प्रसाद, तोसिफ, सुरेंद्र सिंह, सोनल शांति सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।
चतरा में उपायुक्त और एसपी ने दी श्रद्धांजलि
चतरा । समाहरणालय स्थित सभा कक्ष में दिशोम गुरु की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपायुक्त रवि आनंद और पुलिस अधीक्षक अनिमेष नैथानी ने उनके चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए उपायुक्त रवि आनंद ने कहा कि शिबू सोरेन ने आदिवासी समाज के अधिकारों, सामाजिक न्याय और जनकल्याण के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके विचार, संघर्ष और योगदान आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरित करते रहेंगे।
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी शिबू सोरेन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को श्रद्धापूर्वक नमन किया
खूंटी में झामुमो के कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि
झारखंड मुक्ति मोर्चा खूंटी जिला समिति की ओर से मंगलवार को जिला अध्यक्ष ज़ुबैर अहमद की अध्यक्षता में भगत सिंह चौक पर दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस दौरान तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया, खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं ने गुरुजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
सभा को संबोधित करते हुए तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन झारखंड के लोगों के अधिकार, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सामाजिक न्याय के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि गुरुजी का संघर्ष और त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है और उनके सपनों के झारखंड के निर्माण के लिए सभी को उनके बताए मार्ग पर चलना होगा।
खूंटी विधायक राम सूर्या मुंडा ने कहा कि शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन की आत्मा थे। उन्होंने आदिवासी, दलित, गरीब और वंचित समाज की आवाज़ को बुलंद किया। उनका संघर्ष, सादगी और जनसेवा का जीवन हमेशा लोगों को प्रेरित करता रहेगा।
जुबली पार्क गोलचक्कर को दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नाम से की पुकारने की घोषणा
पूर्वी सिंहभूम : दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को साकची स्थित जुबली पार्क गेट नंबर-1 गोलचक्कर पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर इस स्थल को “दिशोम गुरु शिबू सोरेन गोलचक्कर” के नाम से पहचान देने की घोषणा की। इस अवसर पर पत्थलगड़ी कर शिलापट्ट भी स्थापित किया गया। इससे पहले झामुमो के कार्यालय से जूलुस निकाल गया। जिसमें दिशोम गुरु शिबू सोरेन की तस्वीर को गाड़ी में सजाकर लोग नारेबाजी करते हुए जुबली पार्क गेट पर पहुंचे।
हालांकि, इस नामकरण को लेकर अब तक किसी सरकारी प्राधिकरण की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। शहर में सार्वजनिक स्थलों के नामकरण का अधिकार जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) के पास है।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के तहत पूजा-अर्चना से हुई। इसके बाद शिबू सोरेन की स्मृति में शिलापट्ट स्थापित किया गया और उपस्थित नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इस दौरान “दिशोम गुरु अमर रहें” और “जोहार शिबू सोरेन” के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
सभा को संबोधित करते हुए झामुमो नेताओं ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने अलग झारखंड राज्य के आंदोलन को नई दिशा और पहचान दिलाई। उन्होंने आदिवासियों, मूलवासियों, किसानों, मजदूरों और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। वक्ताओं ने कहा कि उनका जीवन संघर्ष, त्याग और जनसेवा की मिसाल है और आने वाली पीढ़ियां उनके आदर्शों से प्रेरणा लेती रहेंगी।
नेताओं ने कहा कि जुबली पार्क गोलचक्कर को दिशोम गुरु के नाम से जोड़ना उनके योगदान के प्रति सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इस संबंध में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया भी पूरी होगी।
कार्यक्रम में झामुमो के जिलाध्यक्ष विक्टर सोरेन, मीडिया प्रभारी अरुण सिंह राजा, पूर्व सांसद सुमन महतो, प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाडंगी, मोहन कर्मकार, राजू गिरी, अल्पसंख्यक मंत्री हिदायतुल्लाह खान सहित बड़ी संख्या में पार्टी के कार्यकर्ता मौजूद थे।
झामुमो जिला अध्यक्ष ज़ुबैर अहमद ने कहा कि गुरुजी के विचार और आदर्श पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने जिस संघर्ष और समर्पण से झारखंड को नई पहचान दिलाई, उसे आगे बढ़ाना प्रत्येक कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और गुरुजी के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
श्रद्धांजलि सभा में झामुमो की केंद्रीय सदस्य स्नेहलता कुंडलना, सुशांति कोनगाड़ी, मकसूद अंसारी, भोलानाथ लाल, अमृत हेमरोम, अमरनाथ मुंडा, देवनाथ मघैया, सनिका बोदरा, गुलशन सिंह मुंडा सहित सैकड़ों झामुमो कार्यकर्ता उपस्थित थे।
