कोलकाता, 26 सितंबर। पश्चिम बंगाल राज्य नृत्य अकादमी के तत्वावधान में शनिवार को तीन दिवसीय ‘गौड़ीय नृत्य कार्यशाला’ का शुभारंभ हुआ। कोलकाता के टॉलीगंज स्थित पश्चिम बंगाल राज्य नृत्य अकादमी भवन में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन राज्य की सूचना एवं संस्कृति तथा पर्यटन विभाग की राज्यमंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने किया। कार्यशाला में कुल 50 विद्यार्थी भाग ले रहे हैं।
इस अवसर पर मंत्री पूर्णिमा चक्रवर्ती ने कहा कि जिस तरह बंगाल के साहित्य में संकीर्तन का उल्लेख मिलता है, उसी तरह गौड़ीय नृत्य भी बंगाल की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में इस नृत्यशैली का चलन धीरे-धीरे कम होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल नृत्य अकादमी और दूर-दराज से आए विद्यार्थियों की स्वैच्छिक एवं उत्साहपूर्ण भागीदारी के माध्यम से इस नृत्यशैली को पुनर्जीवित करने का सामूहिक प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने भविष्य में संकीर्तन अकादमी स्थापित किए जाने की भी घोषणा की। उन्होंने बंगाल के भावी नृत्यप्रेमियों से गौड़ीय नृत्य के इतिहास से जुड़ने का आग्रह किया। साथ ही गौड़ीय नृत्य को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरव के साथ प्रस्तुत करने का संदेश दिया।
कार्यशाला की प्रशिक्षक डॉ. महुआ मुखोपाध्याय ने गौड़ीय नृत्य के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ने कहा कि ‘गौड़ीय’ शब्द की उत्पत्ति ‘गौड़’ से हुई है। नाट्यशास्त्र में वर्णित करीब 2500 वर्ष पुरानी इस नृत्यशैली का संबंध बंगाल के साहित्य और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। चैतन्य महाप्रभु और नगर संकीर्तन के साथ भी गौड़ीय नृत्य का घनिष्ठ संबंध रहा है।
उन्होंने बंगाल में शास्त्रीय नृत्य की परंपरा के विकास में जयदेव, चैतन्य महाप्रभु और रवींद्रनाथ ठाकुर के योगदान का भी उल्लेख किया। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने गौड़ीय नृत्य को पूर्ण शास्त्रीय नृत्य का दर्जा देने पर विचार करने तथा रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में इसे पूर्ण विषय के रूप में शामिल करने का विशेष आग्रह किया।
