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बताया जा रहा है कि इंफ्रारेड लाइफ डिटेक्टर मशीन के माध्यम से मलबे के अंदर मौजूद किसी व्यक्ति के शरीर के तापमान का पता लगाया जा सकता है। यदि मशीन किसी स्थान पर मानव शरीर की उपस्थिति के संकेत देती है, तो उसके बाद वहां एक छोटे आकार का थर्मल इमेजिंग कैमरा अंदर भेजा जाता है।

इस तकनीक की मदद से फंसे हुए व्यक्ति की सटीक लोकेशन का पता लगाया जाता है। इसके बाद एनडीआरएफ की टीम चिन्हित स्थान पर बेहद सावधानी के साथ लोहे के बीम और अन्य बाधाओं को काटकर राहत एवं बचाव कार्य को आगे बढ़ाती है।

अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से बचाव अभियान की गति बढ़ेगी और मलबे में फंसे लोगों तक जल्द पहुंचने में मदद मिलेगी। मौके पर एनडीआरएफ सहित अन्य एजेंसियां लगातार अभियान में जुटी हुई हैं।