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सिलीगुड़ी, 22 जनवरी । सिलीगुड़ी में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) की टीम को गुरुवार को स्थानीय लोगों के तीखे विरोध का सामना करना पड़ा। लोगों के विरोध प्रदर्शन के चलते एसजेडीए की टीम बिना किसी कार्रवाई के वापस लौट गई।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि महाकाल मंदिर निर्माण के नाम पर वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों का आशियाना छीना जा रहा है। वे लंबे समय से इस इलाके में रह रहे हैं और उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह दुकानों पर निर्भर है। बिना किसी पूर्व नोटिस और वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाने की कोशिश की जा रही है, जो अन्यायपूर्ण है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते 17 जनवरी को माटीगाड़ा सिटी सेंटर के सामने स्थित सरकारी जमीन पर महाकाल मंदिर का शिलान्यास किया था। इसके बाद मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसी को लेकर एसजेडीए की टीम आसपास के क्षेत्रों को खाली कराने में जुटी हुई है। इसी क्रम में गुरुवार सुबह एसजेडीए की टीम जेसीबी के साथ मंदिर परिसर से सटी जमीन पर बने घरों और दुकानों को हटाने पहुंची थी। जेसीबी को देखते ही स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए और जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। काफी देर तक चले हंगामे के बाद एसजेडीए की टीम को पीछे हटना पड़ा।

एसजेडीए अधिकारियों के अनुसार, सरकारी निर्देशों के तहत कार्रवाई की जा रही थी और इससे पहले तीन बार नोटिस भी दिया जा चुका है। अतिक्रमण नहीं हटने के कारण टीम को कार्रवाई के लिए भेजा गया था, लेकिन विरोध के चलते काम नहीं हो सका है।

एसजेडीए सूत्रों ने बताया कि अगली बार विधिवत नोटिस देकर दोबारा कार्रवाई की जाएगी।