MANFRED_SOMMER

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कोलकाता, 09 मई। कोलकाता का “नवान्न” अर्थात नई उपज। यह नाम पश्चिम बंगाल की उस 14 मंजिला इमारत का है, जो पिछले 13 वर्षों से राज्य की सत्ता का प्रमुख केंद्र रही है। यहीं से मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य सचिव, गृह सचिव समेत राज्य सरकार के तमाम शीर्ष अधिकारी और विभाग कामकाज संचालित करते रहे। अब राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने फैसला किया है कि प्रशासनिक कामकाज फिर से ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग से ही संचालित होगा।

नवान्न का निर्माण मूल रूप से वस्त्र उद्योग और गारमेंट सेक्टर के विकास के उद्देश्य से किया गया था। वर्ष 2011 तक शासन करने वाली वाम मोर्चा सरकार ने इसके निर्माण की जिम्मेदारी एचआरबीसी (हुगली रिवर ब्रिज कमिश्नर्स) को सौंपी थी। करीब 75 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस 14 मंजिला इमारत में गारमेंट उद्योग से जुड़े उद्यमियों और विभिन्न प्रतिनिधि संस्थाओं को स्थान दिया जाना था। साथ ही यहां वस्त्र उत्पादन में गुणवत्ता और शोध कार्यों को बढ़ावा देने की भी योजना थी।

लेकिन वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस सरकार बनने के बाद शुरुआत में नई सरकार ने राइटर्स बिल्डिंग से ही कामकाज जारी रखा, लेकिन वर्ष 2013 तक राइटर्स बिल्डिंग में बड़े पैमाने पर मरम्मत और पुनर्निर्माण की आवश्यकता महसूस की गई। इसके बाद सरकार ने वैकल्पिक सचिवालय की तलाश शुरू की और उसकी नजर नवान्न भवन पर पड़ी।

सरकार को तत्काल एक नए सचिवालय की जरूरत थी। लोक निर्माण विभाग को भवन को सचिवालय के अनुरूप तैयार करने का आदेश दिया गया। विभाग ने रिकॉर्ड डेढ़ महीने के भीतर नवान्न को आधुनिक राज्य सचिवालय में बदल दिया। 5 अक्टूबर 2013 को इसका औपचारिक उद्घाटन हुआ और इसके बाद राज्य सरकार का पूरा प्रशासनिक कामकाज यहीं से संचालित होने लगा।

कोलकाता और हावड़ा के बीच गंगा नदी पर बने देश के प्रमुख केबल-स्टे पुल विद्यासागर सेतु के सर्विस लेन के पास स्थित नवान्न भवन जल्द ही राज्य की सत्ता का नया पावर सेंटर बन गया। भवन की सबसे ऊपरी यानी 14वीं मंजिल पर मुख्यमंत्री का कार्यालय बनाया गया, जबकि 13वीं मंजिल पर मुख्य सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठते थे। बाद में यहां बड़े सरकारी कार्यक्रमों और बैठकों के लिए “नवान्न सभागार” नामक कन्वेंशन सेंटर का भी निर्माण किया गया।

करीब 13 वर्षों तक पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासन का केंद्र रहने के बाद अब नवान्न की भूमिका बदलने जा रही है, क्योंकि नई सरकार ने प्रशासन को फिर से राइटर्स बिल्डिंग में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया है।

 

राइटर्स बिल्डिंग पश्चिम बंगाल की सत्ता का ऐतिहासिक केंद्र

मध्य कोलकाता के डलहौजी इलाके में स्थित ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग को भला कौन नहीं जानता। वर्ष 1947 से 2013 तक यह पश्चिम बंगाल के शासन तंत्र का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र रहा। लेकिन वर्ष 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के दो साल बाद यहां की प्रशासनिक गतिविधियां धीरे-धीरे समाप्त हो गईं और राज्य सचिवालय को नवान्न स्थानांतरित कर दिया गया। अब एक बार फिर राइटर्स बिल्डिंग के पुराने दिन लौटने वाले हैं, क्योंकि नई भाजपा सरकार ने फैसला किया है कि सरकार का कामकाज फिर से यहीं से संचालित होगा।

राइटर्स बिल्डिंग का निर्माण 18वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में हुआ था। वर्ष 1777 में अंग्रेज वास्तुकार थॉमस लायन ने इसकी डिजाइन तैयार की थी। इसका दक्षिणी हिस्सा लालदिघी के उत्तरी छोर के समानांतर बनाया गया था। लालदिघी और राइटर्स बिल्डिंग के बीच एक सड़क गुजरती है, जो आगे लालबाजार की ओर जाती है।

शुरुआत में इस भवन का उपयोग अंग्रेजों ने ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासनिक कार्यालय के रूप में किया। समय के साथ जैसे-जैसे प्रशासनिक जरूरतें बढ़ती गईं, भवन में कई बदलाव और विस्तार किए गए। बाद में जब कोलकाता देश की राजधानी बना, तब राइटर्स बिल्डिंग की अहमियत और बढ़ गई। राजधानी दिल्ली स्थानांतरित होने के बाद भी कोलकाता अंग्रेजों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना रहा और राइटर्स बिल्डिंग प्रशासन का प्रमुख केंद्र बनी रही।

आजादी के बाद यह पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और राज्य सचिवालय का मुख्य कार्यालय बन गया। यहां मुख्यमंत्री का दफ्तर होने के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण सरकारी विभागों के कार्यालय भी संचालित होते थे।

बताया जाता है कि 18वीं शताब्दी के अंतिम दौर में अंग्रेजों का प्रशासनिक कामकाज काफी बढ़ गया था। लिखने-पढ़ने, रिकॉर्ड रखने, बैठकों और प्रशासनिक निर्णयों के लिए बड़े कार्यालयों की आवश्यकता महसूस हुई। चूंकि यहां बड़ी संख्या में “राइटर्स” यानी लेखा-जोखा और दस्तावेज तैयार करने वाले कर्मचारी बैठते थे, इसलिए इस भवन का नाम “राइटर्स बिल्डिंग” पड़ गया।

राइटर्स बिल्डिंग का कुल निर्मित क्षेत्रफल लगभग 5.5 लाख वर्गफुट बताया जाता है। नवान्न में सचिवालय स्थानांतरित होने से पहले यहां मुख्यमंत्री कार्यालय के अलावा राज्य सरकार के 34 विभाग संचालित होते थे। इन विभागों में काम करने वाले करीब 6 हजार से अधिक कर्मचारी यहीं बैठकर सरकारी कामकाज और फाइलों का निपटारा करते थे।