onkkkk

कोलकाता, 26 अक्टूबर (हि.स.)। पश्चिम बंगाल में ‘असली तृणमूल कांग्रेस साबित करने की कानूनी लड़ाई अब सड़क पर आ गई है। चुनाव आयोग में जमा किए जाने वाले दस्तावेजों को लेकर सोमवार तड़के भारी विवाद खड़ा हो गया। बागी गुट के नेता और पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने आरोप लगाया है कि सड़क मार्ग से दिल्ली ले जाए जा रहे उनके हलफनामों और दस्तावेजों से भरे ट्रक पर हमला किया गया है। ऋतब्रत गुट ने इस हमले के पीछे सीधे तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ‘कालीघाट गुट’ का हाथ होने का अंदेशा जताया है।

ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि आर्थिक रूप से संपन्न कालीघाट गुट के हलफनामे रविवार शाम को ही चार्टर्ड फ्लाइट से दिल्ली पहुंच चुके हैं। चूंकि उनके (बागी) गुट के पास इतने वित्तीय संसाधन नहीं हैं, इसलिए उन्होंने अपने दस्तावेज ट्रक के जरिए सड़क मार्ग से भेजे थे। सोमवार तड़के करीब 3:30 बजे हरियाणा सीमा के पास इस ट्रक पर हमला किया गया।

ऋतब्रत ने सोमवार सुबह 4 बजे सोशल मीडिया पर लिखा कि कालीघाट का हलफनामा चार्टर्ड फ्लाइट से 25 तारीख की शाम को दिल्ली पहुंच चुका है। शनिवार सुबह हमारे कार्यकर्ता दस्तावेज लेकर दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। कुछ समय पहले ट्रक को अपने नियंत्रण में लेने और हमारे दस्तावेज छीनने की कोशिश की गई। हमारे कार्यकर्ताओं ने इसका कड़ा विरोध किया है और लड़ाई जारी है। यह चार्टर्ड संस्कृति और जमीनी स्तर के संकल्प के बीच की लड़ाई है। तानाशाह हर जगह सुसंगठित लूटपाट की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी यह कोशिश सफल नहीं होगी।

ऋतब्रत गुट के विधायक अखरुज्जमां ने भी इस घटना को लेकर कहा कि हरियाणा बॉर्डर के पास हमारे ट्रक को हाईजैक करने की कोशिश की गई। हमें पूरा शक है कि इसके पीछे कालीघाट टीएमसी का प्रत्यक्ष समर्थन है।

ममता बनर्जी गुट की सांसद दोला सेन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “नाच न जाने आंगन टेढ़ा। आमतौर पर झूठ सुनकर मुझे गुस्सा आता है, लेकिन इस बात पर हंसी आ रही है। अंततः सत्य, न्याय और जनता ही अंतिम फैसला करेगी। जिन्हें अपनी सदस्य संख्या साबित करने के लिए पुलिस-प्रशासन पर निर्भर रहना पड़ रहा है, उन्हें जनता ही सबक सिखाएगी।”

ट्रक हमले की इस घटना से ठीक एक दिन पहले, रविवार को ममता बनर्जी ने स्वयं ऋतब्रत गुट और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर गंभीर आरोप लगाए थे। ममता ने दावा किया था कि पुलिस और प्रशासन भाजपा के इशारे पर काम कर रहे हैं और लोगों को डरा-धमका कर जबरन स्टैंप पेपर पर हस्ताक्षर करवाए जा रहे हैं।

ममता बनर्जी ने कहा था, “पुलिस का अत्याचार चरम पर पहुंच गया है। चुनाव आयोग ने हमें दस्तावेज जमा करने को कहा है, लेकिन सरकार कानूनी कागजात और स्टैंप पेपर पुलिस के हवाले कर रही है ताकि हमारे लिए सभी रास्ते बंद हो जाएं। विधायकों और कार्यकर्ताओं को धमकी दी जा रही है कि अगर वे हमारे साथ रहे तो उन्हें जेल भेज दिया जाएगा।” इससे पहले 14 और 15 अक्टूबर को कालीघाट गुट ने राज्य के डीजीपी, आईजी और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की थी।

उल्लेखनीय है कि, चुनाव आयोग ने टीएमसी के ‘जोड़ा फूल’ (दो फूल) चुनाव चिह्न को ‘फ्रीज’ कर दिया है। बीते 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि दोनों गुटों को चार सप्ताह के भीतर चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामे जमा कर यह साबित करना होगा कि असली तृणमूल कांग्रेस कौन है। चुनाव आयोग को इस मामले में तीन महीने के भीतर अपना अंतिम फैसला सुनाना है।-