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कोलकाता, 04 सितंबर । पश्चिम बंगाल को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में राज्य सरकार ने पर्यटन क्षेत्र के लिए 500 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है। इसके साथ ही गंगा में पर्यटकों के लिए आनंददायक नौका यात्राओं को बढ़ावा देने के लिए 11 नए जलयानों की खरीद की जाएगी। सरकार ने शुक्रवार को पर्यटन विभाग का नया लोगो और नई प्रचार पंक्ति भी जारी की।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता के अलीपुर स्थित धनो धान्य सभागार में आयोजित कार्यक्रम में पर्यटन विभाग का नया लोगो जारी किया। इसके साथ ‘वेस्ट बंगाल – व्हेयर इंडिया फील्स डिफरेंट”’ को नई पहचान बनाया गया है। प्रचार अभियान की पंक्ति ‘ नई दृष्टि से नए रूप में देखें’ रखी गई है। पर्यटन विभाग के लिए एक विशेष रिंगटोन भी जारी की गई।

राज्य सरकार के अनुसार 500 करोड़ के प्रस्तावित निवेश से सुंदरबन से लेकर दार्जिलिंग तक सरकारी पर्यटक आवासों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। मंदारमणि को अंतरराष्ट्रीय स्तर के समुद्र तट पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के साथ नदी पर्यटन का विस्तार और कोलकाता में जल मेट्रो शुरू करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गंगा में पर्यटकों के लिए कम से कम 11 नए जलयान चलाए जाएंगे। प्रस्तावित पर्यटन मार्गों में बाबूघाट से सुंदरबन और गंगा के किनारे स्थित अन्य पर्यटन स्थलों तक की यात्राएं शामिल हैं। नदी तट, द्वीपों और प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर एकदिवसीय और रात्रि प्रवास वाले पर्यटन मार्ग भी विकसित किए जाएंगे।

शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि नई ब्रांडिंग का उद्देश्य पश्चिम बंगाल को फिर से प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना और राज्य की प्राकृतिक तथा सांस्कृतिक संपदा का बेहतर इस्तेमाल करना है। उन्होंने कहा कि बंगाल में प्राकृतिक संसाधनों और पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन कई अन्य राज्यों ने पर्यटन ढांचे और संपर्क व्यवस्था के विकास में काफी आगे बढ़कर पर्यटकों को आकर्षित किया है। अब बंगाल को इस स्थिति से आगे निकलना होगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पश्चिम बंगाल पर्यटन विकास निगम को मजबूत कर रही है। पर्यटन क्षेत्र में रोजगार और मानव संसाधन बढ़ाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। नई पर्यटन पहचान में हिमालय, चाय बागानों, गंगा और सुंदरबन के साथ बंगाल की जीवंत विरासत, समकालीन रचनात्मकता और यहां के लोगों की आत्मीयता को प्रमुखता दी गई है। सरकार का जोर केवल पर्यटन स्थलों को दिखाने के बजाय पर्यटकों को बंगाल के अनुभव से जोड़ने पर है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोलकाता देश का जल मेट्रो परियोजना से जुड़ने वाला 17वां शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। नदी तट और घाटों को पर्यटन तथा संपर्क के नए केंद्रों के रूप में विकसित करने की योजना है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गोवा समेत उन राज्यों के सफल पर्यटन मॉडल का अध्ययन कर रही है, जहां पर्यटन ने बड़ी अर्थव्यवस्था का रूप लिया है। इसके अलावा बांग्लादेश के साथ सहयोग की संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।

उत्तर बंगाल में पर्यटन को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सिक्किम जाने वाले लगभग सभी रास्ते पश्चिम बंगाल से होकर गुजरते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में पर्यटक दार्जिलिंग, कर्सियांग और कालिम्पोंग जैसे राज्य के पर्वतीय पर्यटन स्थलों को छोड़कर आगे चले जाते हैं। सरकार का प्रयास होगा कि पर्यटक बंगाल में अधिक समय बिताएं।

उन्होंने कहा कि इसके लिए बेहतर आवास, संपर्क व्यवस्था, पर्यटक सुविधाओं और सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। प्रमुख पर्यटन स्थलों पर पुलिस व्यवस्था मजबूत करने के साथ पुलिस अतिथि गृहों को भी बेहतर सुविधाओं से लैस करने की योजना है।

पर्यावरण संरक्षण को भी पर्यटन नीति का हिस्सा बनाया गया है। सुंदरबन के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए इस वर्ष 20 लाख मैंग्रोव पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान में विद्यार्थियों को भी शामिल किया जाएगा। वहीं, 2 अक्टूबर को बक्सा टाइगर रिजर्व में बाघों को छोड़ने का कार्यक्रम प्रस्तावित है।

पर्यटन मंत्री शंकर घोष ने कहा कि विभाग ने पिछले तीन महीनों में बंगाल के पर्यटन को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए रणनीति तैयार की है। इसके लिए ‘ नेतृत्व के लिए जन्मे’ की थीम रखी गई है। उन्होंने कहा कि नया लोगो और नई ब्रांडिंग राज्य के पर्यटन क्षेत्र में नए अध्याय की शुरुआत करेगी।

पर्यटन विभाग अपनी ब्रांडिंग में बंगाल की सांस्कृतिक परंपराओं को भी शामिल करेगा। विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को वर्ष में 12 निर्धारित अवसरों पर पारंपरिक परिधान पहनने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।