कोलकाता, 13 जुलाई । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा तृणमूल कांग्रेस के कई बैंक खाते फ्रीज किए जाने के मामले में सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मामले में पक्षकार बनने की अनुमति मांगी, लेकिन न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने उनका आवेदन खारिज कर दिया।
अदालत ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस पर अधिकार और वैध प्रतिनिधित्व का प्रश्न फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग के विचाराधीन है, इसलिए इस स्तर पर अदालत उस विवाद में हस्तक्षेप नहीं करेगी।
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी की ओर से सांसद डेरेक ओ’ब्रायन को याचिका पर हस्ताक्षर करने के लिए राष्ट्रीय कार्यकारी समिति की ओर से अधिकृत नहीं किया गया था। उन्होंने दलील दी कि उचित प्राधिकरण के बिना दायर याचिका पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए और इसमें तथ्यों को छिपाए जाने की आशंका भी है।
तृणमूल कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसका विरोध करते हुए कहा कि नौ जुलाई को इसी मामले में हाई कोर्ट पहले ही अंतरिम आदेश दे चुका है, इसलिए तथ्यों को छिपाने का आरोप निराधार है।
उन्होंने बताया कि ईडी ने पहले तीन और अब तक कुल आठ बैंक खाते फ्रीज कर दिए हैं। उनका कहना था कि इन खातों से चार मई से पहले चुनावी खर्च किए गए थे और उस समय कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी। बाद में 18 जून की शिकायत के आधार पर 19 जून को खाते फ्रीज किए गए और सात जुलाई को ईडी ने फिर कार्रवाई की।
सिंघवी ने तर्क दिया कि बैंक खाते फ्रीज कर किसी राजनीतिक दल की सामान्य गतिविधियों को बाधित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पहले संगठन को वित्तीय रूप से पंगु बना दिया जाता है और फिर अदालत जाने की सलाह दी जाती है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।
तृणमूल की ओर से अधिवक्ता किशोर दत्त ने कहा कि लगभग 440 करोड़ रुपये के विमान और हेलीकॉप्टर खरीद से जुड़े आरोपों के आधार पर कार्रवाई की गई है और ईडी पुलिस की तरह काम कर रही है। इस पर न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने पूछा कि यदि कुछ बैंक खातों के संचालन की अनुमति दी गई है, तो समस्या क्या है। जवाब में दत्त ने ईसीआईआर को रद्द करने और सभी बैंक खातों को तत्काल डी-फ्रीज करने की मांग की।
इस दौरान ऋतब्रत बनर्जी की ओर से अधिवक्ता जिष्णु चौधरी ने मामले में पक्षकार बनने का अनुरोध किया, जिसे अदालत ने अस्वीकार कर दिया।
सुनवाई के अंत में न्यायमूर्ति कृष्णा राव ने ईडी से पूछा कि क्या उसकी जांच पुलिस की एफआईआर पर आधारित है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल धीरज त्रिवेदी ने कहा कि यदि पुलिस की शिकायत में धनशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य मिलते हैं, तो ईडी स्वतंत्र रूप से भी जांच कर सकती है।
