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कोलकाता, 01 अक्टूबर। आर.जी. कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक मेडिकल छात्रा के साथ हुए बलात्कार और हत्या के मामले में, पीड़िता के अंतिम संस्कार से जुड़े एक नए विवाद की जांच राज्य पुलिस से छीनकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने वापस केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र पर गंभीर सवाल उठाते हुए पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। न्यायमूर्ति शंपा सरकार की पीठ ने राज्य पुलिस की कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए पूछा कि क्या पुलिस अदालत के साथ चालाकी करने के उद्देश्य से इस मामले में नई एफआईआर (प्राथमिकी) दर्ज कर रही है।

ज्ञात हो कि राज्य में नई सरकार के गठन के बाद, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आर.जी. कर मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए थे। उनके निर्देश पर खड़दह थाने की पुलिस ने एक नई एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पीड़िता के शव का जल्दबाजी में अंतिम संस्कार कर दिया गया था। इस एफआईआर के आधार पर पुलिस ने पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष, संजीव मुखर्जी और सोमनाथ दे को गिरफ्तार भी किया था।

हालांकि, पुलिस की इस तत्परता पर उच्च न्यायालय ने सख्त ऐतराज जताया है। न्यायमूर्ति शंपा सरकार ने कहा कि अदालत की निगरानी में सीबीआई पहले से ही आर.जी. कर मामले की जांच कर रही है और इसके लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन भी किया गया है। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा, “सीबीआई जांच कर रही है। हमने नई एसआईटी का गठन किया है। अदालत निगरानी कर रही है। क्या पुलिस को यह नहीं पता? नई एफआईआर क्यों दर्ज की गई?”

न्यायमूर्ति ने आगे कहा, “हमने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जांच कैसे होगी और जांच दल को सभी पहलुओं पर गौर करने का निर्देश दिया था। क्या खड़दह थाने की पुलिस कानून से अनजान है? या अदालत के साथ चालाकी करने के लिए एफआईआर दर्ज की गई है?” अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए जा सकते हैं।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आर.जी. कर मामले की जांच सीबीआई ही करेगी, और अंतिम संस्कार से जुड़ी शिकायतों की जांच भी केंद्रीय एजेंसी ही करेगी।

अदालत के आदेश के बाद, खड़दह थाने की पुलिस इस मामले में आगे कोई जांच नहीं कर सकेगी। इस मामले में पीड़िता के परिवार की ओर से अधिवक्ता जयंत नारायण चटर्जी और शीर्षेंदु सिन्हा रॉय ने पक्ष रखा।

गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही भाजपा नेताओं ने वादा किया था कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो आर.जी. कर मामले की फाइल दोबारा खोली जाएगी। आरोप था कि पिछली सरकार के दौरान जांच में कई खामियां थीं और कई प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई थी। सत्ता में आने के बाद, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इन आरोपों के आधार पर नए सिरे से जांच के आदेश दिए थे। लेकिन अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि जिस मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी कर रही हो, उसमें राज्य की एजेंसी हस्तक्षेप नहीं कर सकती। इसी आधार पर अदालत ने पुलिस से जांच का जिम्मा लेकर सीबीआई को सौंप दिया है।