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कोलकाता, 30 जनवरी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (एसएससी) और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे स्कूल लेवल सेलेक्शन टेस्ट (एसएलएसटी)–2025 के तहत की जा रही शिक्षक भर्ती में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम के पालन से जुड़े आरोपों पर हलफनामा दाखिल करें।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा की एकल पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि दिव्यांग श्रेणी में 100 पद उम्मीदवारों की अनुपलब्धता के कारण नहीं भरे जा सके। याचिका में मांग की गई है कि आयोग इन पदों की प्रकृति बदलकर किसी अन्य श्रेणी में नियुक्ति न करे।

अदालत ने एसएससी और राज्य सरकार को याचिका में उठाए गए बिंदुओं पर चार सप्ताह के भीतर अपना-अपना विरोधी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता को इन हलफनामों पर दो सप्ताह के भीतर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति दी गई है।

न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि दिव्यांग श्रेणी के रिक्त 100 पदों को लेकर आयोग द्वारा उठाए गए सभी कदम याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। अदालत ने निर्देश दिया कि सभी पक्षों के हलफनामे दाखिल होने के बाद मामले की पुनः सुनवाई की जाएगी।

यह याचिका एसएससी द्वारा राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोजित द्वितीय स्कूल लेवल सेलेक्शन टेस्ट (एसएलएसटी), 2025 में आरक्षण प्रावधानों को चुनौती देते हुए दाखिल की गई है।

याचिकाकर्ता का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 तथा उससे संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया। वहीं, एसएससी का दावा है कि भर्ती में आरक्षण कानून और नियमों के अनुसार ही किया गया है। एसएससी और राज्य सरकार, दोनों ने याचिका में की गई मांगों का विरोध करते हुए अदालत से हलफनामा दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार कर लिया गया।

मामले को लेकर अब सभी की नजरें एसएससी और राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए जाने वाले हलफनामों और अदालत की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।