पूर्वी सिंहभूम, 29 दिसंबर । भाजपा नेता एवं ऑल इंडिया संथाली फिल्म संगठन के अध्यक्ष रमेश हांसदा ने जमशेदपुर के करनडीह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के आगमन को संथाल समाज के लिए गर्व और सम्मान का ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि करनडीह की यह धरती पंडित रघुनाथ मुर्मू की कर्मस्थली रही है, जहां से ओल चिकी लिपि के लिए संघर्ष की शुरुआत हुई थी। ऐसे पावन स्थल पर राष्ट्रपति का आगमन पूरे समाज के लिए गौरवशाली और यादगार पल है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु सोमवार को जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान प्रांगण में आयोजित 22वें संताली ‘परसी माहा’ एवं ओल चिकी लिपि शताब्दी समारोह में शामिल हुईं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरन और राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार भी उपस्थित थे।
रमेश हांसदा ने कहा कि ओल चिकी लिपि केवल एक लिपि नहीं, बल्कि संथाल समाज की पहचान, संस्कृति और अस्मिता का प्रतीक है। शताब्दी समारोह के माध्यम से न केवल देश, बल्कि पूरी दुनिया में ओल चिकी लिपि के महत्व को नई पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि आज पूरा समाज इस ऐतिहासिक क्षण को गर्व के साथ महसूस कर रहा है और उत्सव का आनंद ले रहा है।
उन्होंने पंडित रघुनाथ मुर्मू के संघर्षों को याद करते हुए कहा कि ओल चिकी लिपि के प्रचार-प्रसार के लिए उन्होंने नाटकों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क के विभिन्न माध्यमों का सहारा लिया। यह एक लंबा और कठिन संघर्ष था, जिसमें समाज के कई लोगों ने सहयोग किया। हांसदा ने गर्व के साथ बताया कि उनके ससुर भी पंडित रघुनाथ मुर्मू के संघर्ष के शुरुआती सहयोगियों में शामिल रहे, जिसे वे अपने जीवन का सौभाग्य मानते हैं।
उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार से आग्रह किया कि ओल चिकी लिपि को और सशक्त बनाने के लिए प्राथमिक शिक्षा में इसे अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। विशेष रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों में कक्षा एक से पांच तक ओल चिकी लिपि में पढ़ाई कराई जाए, ताकि बचपन से ही बच्चों में अपनी मातृभाषा और लिपि के प्रति जागरूकता और गर्व विकसित हो सके। रमेश हांसदा ने विश्वास जताया कि इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने से ओलचिकी लिपि का संरक्षण और विकास और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ेगा।
