रांची, 18 जून। राजधानी रांची के निवारणपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रदेश कार्यालय पर पेट्रोल बम फेंकने के मामले में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। जांच एजेंसियां हमले के पीछे संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और साजिश के विभिन्न पहलुओं की गहन पड़ताल कर रही हैं।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में अमन अंसारी, सैफ और सयान खान शामिल हैं। इनमें से दो आरोपी लोहरदगा जिले के निवासी हैं, जबकि एक आरोपी रांची का रहने वाला है। जांच एजेंसियों का दावा है कि आरोपियों में से एक हाल ही में दुबई से भारत लौटा था और वहीं उसके कुछ संदिग्ध व्यक्तियों से संपर्क स्थापित हुए थे।
ट्रेन से दिल्ली भाग रहे थे आरोपी, रफीगंज के पास धराए
जांच के दौरान यह जानकारी मिली कि दो आरोपी बुधवार रात रांची-नई दिल्ली झारखंड स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस से दिल्ली भागने की कोशिश कर रहे हैं। सूचना मिलते ही रांची, बोकारो और कोडरमा पुलिस की संयुक्त टीम सक्रिय हुई। पुलिसकर्मी विभिन्न स्टेशनों से ट्रेन में सवार होकर अलग-अलग बोगियों में आरोपियों की तलाश करते रहे। लगातार निगरानी के बाद गया जंक्शन पार करने के उपरांत रफीगंज के निकट जनरल बोगी से दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। पूरे अभियान की निगरानी रांची के सिटी एसपी पारस राणा स्वयं कर रहे थे।
दुबई कनेक्शन और संदिग्ध संपर्कों की जांच
जांच एजेंसियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में से एक अमन अंसारी हाल ही में दुबई से भारत लौटा था। पूछताछ में उसकी मुलाकात राना हुसैन उर्फ राना जी और शाहबाज आलम उर्फ भट्टी नामक व्यक्तियों से होने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों का दावा है कि दुबई में ही आरोपी को रांची स्थित आरएसएस प्रदेश कार्यालय को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया था। उसका आतंकवादी संगठन आईएसआई से संपर्क है। आईएसआई के कहने पर ही संघ कार्यालय पर हमला किया गया था। उसे इससे बड़ा भी कुछ करना था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच पड़ताल कर रही है और आरोपितों से पूछताछ कर रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि दुबई से मिले निर्देशों के बाद आरोपियों ने पेट्रोल बम तैयार किए और संघ कार्यालय पर हमला किया। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
मोबाइल, बैंक खातों और विदेशी संपर्कों की पड़ताल
सुरक्षा एजेंसियां आरोपियों के मोबाइल फोन, इंटरनेट गतिविधियों, बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और विदेशी संपर्कों की गहन जांच कर रही हैं। मामले के कथित मास्टरमाइंड तथा अन्य संभावित सहयोगियों तक पहुंचने के लिए लगातार छापेमारी अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान आने वाले दिनों में कई और महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
पुलिस हिरासत से फरार हुआ आरोपी
इसी बीच गुरुवार को मामले ने नया मोड़ ले लिया, जब गिरफ्तार आरोपियों में से एक सैफ पुलिस हिरासत से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार उसे कोतवाली थाना में पूछताछ के लिए रखा गया था। दोपहर में उसने बाथरूम जाने की अनुमति मांगी। बाथरूम के अंदर नल खोलकर उसने प्रहरी को भ्रमित किया और खिड़की के रास्ते झाड़ियों का सहारा लेकर फरार हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही रांची पुलिस में हड़कंप मच गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी), सिटी एसपी तथा विभिन्न थानों की पुलिस टीमों को उसकी तलाश में लगाया गया। शहर और आसपास के क्षेत्रों में व्यापक तलाशी अभियान चलाया गया।
मांडर में मुठभेड़, पैर में लगी गोली
पुलिस के अनुसार फरार आरोपी की लोकेशन मांडर टोल प्लाजा के पास मिली, जिसके बाद घेराबंदी की गई। इस दौरान आरोपी ने कथित रूप से एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनने तथा पुलिस पर फायरिंग करने का प्रयास किया। जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की, जिसमें आरोपी के पैर में गोली लग गई।
रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि घेराबंदी के दौरान आरोपी ने पुलिस दल पर हमला करने की कोशिश की थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने आत्मरक्षा में गोली चलाई। घायल आरोपी को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है।
आईएसआई संलिप्तता के आरोपों की भी जांच
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनमें कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और विदेशी एजेंसियों से जुड़े संभावित संबंधों की बात सामने आई है। कुछ अधिकारियों ने पूछताछ के आधार पर आईएसआई से संपर्क होने की आशंका भी जताई है। हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी विदेशी एजेंसी या संगठन की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इस संबंध में जांच जारी है।
अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच कई स्तरों पर चल रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों, डिजिटल डेटा और पूछताछ से प्राप्त जानकारियों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इस मामले से जुड़े अन्य लोगों और संभावित साजिशकर्ताओं के संबंध में भी जल्द महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है।
