नई दिल्ली, 14 अक्टूबर । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 15 अक्टूबर, गुरुवार को लद्दाख में करीब 3,350 करोड़ रुपये की पांच विकास परियोजनाएं राष्ट्र को समर्पित करेंगे। प्रधानमंत्री दोपहर करीब 12:30 बजे इस कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे और उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे। इन परियोजनाओं से क्षेत्र में हवाई संपर्क, सामरिक सड़क कनेक्टिविटी, बिजली आपूर्ति, सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और जल सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, प्रधानमंत्री लेह स्थित कुशोक बकुला रिनपोछे हवाई अड्डे के 640 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए यात्री टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे। 23,800 वर्ग मीटर में फैला यह टर्मिनल सालाना 35 लाख यात्रियों को संभालने की क्षमता रखता है। इसमें ऊर्जा दक्षता बढ़ाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग किया गया है। आधुनिक यात्री सुविधाओं के साथ लद्दाख की सांस्कृतिक विरासत को समाहित करने वाला यह टर्मिनल क्षेत्र का हवाई संपर्क बेहतर करेगा।
प्रधानमंत्री 298 किलोमीटर लंबी निमू-पदुम-दरचा सड़क राष्ट्र को समर्पित करेंगे। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित यह सड़क लेह के निमू को हिमाचल प्रदेश के दरचा से जोड़ती है और दूरस्थ जांस्कर घाटी से होकर गुजरती है। यह श्रीनगर-लेह और मनाली-लेह राजमार्गों के अतिरिक्त लद्दाख के लिए वैकल्पिक संपर्क मार्ग उपलब्ध कराएगी। ऊंचाई वाले शिंकुन ला दर्रे सहित दुर्गम हिमालयी क्षेत्र से गुजरने वाली इस सड़क से सशस्त्र बलों की आवाजाही और रसद आपूर्ति को मजबूती मिलेगी। साथ ही, स्थानीय लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बाजार और अन्य आवश्यक सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्र की जलविद्युत क्षमता के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नौ मेगावाट की हानू लघु जलविद्युत परियोजना तथा 66 केवी की डबल-सर्किट दाह-हानू-खाल्त्सी पारेषण लाइन का उद्घाटन करेंगे। इन परियोजनाओं से बिजली आपूर्ति नेटवर्क की विश्वसनीयता बढ़ेगी और उत्पादित बिजली के पारेषण की व्यवस्था मजबूत होगी।
लद्दाख की प्राचीन पुरातात्विक विरासत के संरक्षण की दिशा में प्रधानमंत्री लेह के सिंधु घाट पर भारत के पहले पेट्रोग्लिफ संरक्षण पार्क का उद्घाटन करेंगे। क्षेत्र में प्रागैतिहासिक शैल चित्रों और उत्कीर्ण आकृतियों के सैकड़ों स्थल हैं, जिनमें वन्यजीवों, मानव आकृतियों और प्रतीकात्मक चित्रों के माध्यम से हजारों वर्षों के इतिहास की झलक मिलती है। यह पार्क इन दुर्लभ पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण, जन-जागरूकता और जिम्मेदार विरासत पर्यटन को प्रोत्साहित करेगा।
प्रधानमंत्री परियोजना हिम सरोवर के तहत 40 गांवों में विकसित 40 जल निकायों का भी उद्घाटन करेंगे। मिशन अमृत सरोवर के उद्देश्यों के अनुरूप इस पहल का मकसद लद्दाख में जल संरक्षण और उपलब्ध पानी का बेहतर प्रबंधन करना है। क्षेत्र में बर्फ पिघलने और हिमनदों से पानी मिलने के बावजूद बुवाई के महत्वपूर्ण मौसम में किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है। इन जल निकायों से उपलब्ध पानी को जरूरत के समय इस्तेमाल करने, सिंचाई में सुधार और कृषि आजीविका को टिकाऊ बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
