कोलकाता, 27 अगस्त । पश्चिम बंगाल की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में संसाधनों और छात्रों की उपलब्धता को लेकर गंभीर असंतुलन सामने आया है। यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 4,133 ऐसे स्कूल हैं जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है। इस मामले में पश्चिम बंगाल अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के बाद देश में दूसरे स्थान पर है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन छात्रविहीन स्कूलों में 19,502 शिक्षक तैनात बताए गए हैं। इससे शिक्षकों की तैनाती और सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दूसरी ओर, राज्य में 6,769 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल एक शिक्षक कार्यरत है। इन स्कूलों में 2.29 लाख से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। ऐसे में एक ही शिक्षक को पढ़ाई के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी संभालनी पड़ रही हैं।
आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में प्रति शिक्षक करीब 30 छात्र हैं। इस मामले में केवल झारखंड का अनुपात अधिक है, जहां एक शिक्षक पर 36 छात्र हैं। वहीं, राज्य में एक स्कूल में औसतन केवल छह शिक्षक हैं। छत्तीसगढ़, झारखंड और मेघालय में यह औसत पांच शिक्षक प्रति स्कूल है।
यूडीआईएसई के आंकड़े राज्य में स्कूलों में छात्रों की संख्या में भारी अंतर भी दिखाते हैं। पश्चिम बंगाल के कुल 93,147 स्कूलों में करीब आठ प्रतिशत स्कूल ऐसे हैं जहां 10 से भी कम छात्र हैं। दूसरी ओर, 8.5 प्रतिशत स्कूलों में 500 से अधिक छात्र पढ़ते हैं।
राज्य सरकार ने आंकड़ों में सामने आए इस अंतर के एक हिस्से के लिए निजी स्कूलों द्वारा सही जानकारी अपलोड नहीं किए जाने को जिम्मेदार ठहराया है। शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने कहा कि स्कूलों को यूडीआईएसई पोर्टल पर छात्रों, शिक्षकों और भवन की स्थिति से जुड़ी जानकारी अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होती है, लेकिन कुछ निजी स्कूलों ने अब तक आंकड़े अपलोड नहीं किए हैं। इससे राज्य की पूरी तस्वीर प्रभावित हो रही है।
उन्होंने कहा कि स्कूलों को जल्द से जल्द आंकड़े अपलोड करने के लिए कहा गया है और जानकारी पूरी होने के बाद राज्य की स्थिति में बदलाव दिखाई देगा।
बर्मन ने पिछले 15 वर्षों में शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं को भी कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी का एक कारण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार इस असंतुलन को दूर करने के लिए काम कर रही है। जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या जरूरत से अधिक है, वहां से शिक्षकों को शिक्षक-विहीन या शिक्षक-कमी वाले स्कूलों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि साल के अंत तक इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
