मास्‍टर जी

मनुष्य हो, भगवान होना है

संसार में जितने भी ग्रंथ और उपनिषद हुए उन्होंने बताया कि तू इंसान है, तू आगे भगवान हो सकता है । भगवान का अर्थ है तेरा अगला पूर्ण विकास जिसके बाद तू इस लोक से परलोक चला जाएगा । भगवान कौन है ?  हम अगर कहीं पीछे चलकर देखें तो बुद्ध, सिद्धार्थ गौतम,  हमारे जैसे इंसान थे जिनकी शादी भी हुई, बच्चा भी हुआ, मौत भी हुई जैसे हमारी होगी। वर्द्धमान भी पहले संसार में थे और एक दिन महावीर भगवान हो गए । नानक संसार में थे, शादी हुई, बच्चे हुए पर गुरु नानक भगवान हो गए । जीसस भी संसार में थे; तैंतीस साल की उम्र में शरीर की मृत्यु हुई और भगवान के बेटे हो गए ! तो संसार में जो भी जन्म लेता है, उसकी मृत्यु होती है और जन्म और मृत्यु के बीच में मनुष्य ने अगर भगवतता को नहीं पाया तो उसका जन्म फेल हो गया यानि वो अगला विकास नहीं कर सका क्योंकि जानवर तक का विकास अपने आप होता है, कुछ करना नहीं पड़ता है ! पेड़ को कब कीड़ा-मकोड़ा बनना है, पंछी बनना है, जानवर बनना है, सब लिखा गया है, स्वचालित है!  तू मनुष्य हुआ, ये तेरी कितने लाखों-करोड़ों साल की यात्रा है; पता है ? कोई एक लाख साल, कोई एक करोड़ साल, कोई दस करोड़ साल की उम्र भोगने के बाद इंसान के चोले में आता है । और मनुष्य जन्म मिलता है साठ, चालीस साल, कभी अस्सी साल, के लिए ताकि तू चाहे तो इस चक्रव्यूह को तोड़ सकता है, इस मरने वाले शरीर से मुक्त हो सकता है, इस दुख-सुख से मुक्त हो सकता है ।इसलिए हमनें इस मनुष्य देह में ही सब भगवान के चेहरे दिखाए । ये इस लोक से परलोक की यात्रा है । हमारी सुई यहीं पर अटक गई है, हम मर कर यहीं पैदा हो जाते हैं । उन्होंने इस लोक से अपने घर, परलोक, जाने की तैयारी कर ली। और ये धरती, धरती के नीचे पाताल और ऊपर कुछ लोक कहे, वहाँ तक की यात्रा मनुष्य देह में है पर सब को एक दिन इनके आगे जाना है, जिसे कहा ‘पारब्रह्म’ ! और वो आकाश के भी पार है । जैसे गुरु नानक देव ने कहा “आकाश ते आकाश” यानि इस पूरे गोल चक्र के बाहर है, आकाश के भी पार है । तुझे मर कर जमीन के नीचे योनियों में जाना है या कहीं एक-दो लोक ऊपर जाना है और फिर इस धरती पर लौटना है; या इस सब के पार अपने परमानेंट घर – पारब्रह्म – जाना है, वो तेरी मर्जी है ।