मीन मंगल उत्‍सव 1

कोलकाता/हुगली, 15 अप्रैल। नववर्ष के पावन अवसर पर नई आशाओं और सकारात्मक संकल्पों के साथ गंगा मिशन द्वारा हुगली के बांसबेड़िया में ‘मीन मंगल उत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। पहेला बैशाख की शुभ बेला में आयोजित इस कार्यक्रम ने सामाजिक सरोकारों और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का सशक्त संदेश दिया।


कार्यक्रम के केंद्र में सेवा और संवेदना का भाव स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ। वैशाख की तीव्र गर्मी को ध्यान में रखते हुए गंगा मिशन ने आमजन के बीच 8 जल शुद्धिकरण यंत्र, 2 वाटर कूलर तथा पक्षियों के लिए 100 घोंसलों का वितरण किया। साथ ही जलाशयों के संरक्षण और शुद्धिकरण के उद्देश्य से 30,000 मछलियों का विसर्जन किया गया।
इस अवसर पर फिजियोथेरेपी केंद्र और रात्रिकालीन आश्रय स्थल (नाइट शेल्टर) का उद्घाटन भी किया गया, जो जरूरतमंदों के लिए महत्वपूर्ण सहारा सिद्ध होगा। बांसबेड़िया के आजाद हिंद पार्क में इन सुविधाओं की शुरुआत के साथ क्षेत्र में जनकल्याणकारी कार्यों को नई दिशा मिली है।


गंगा मिशन के अखिल भारतीय महासचिव प्रह्लाद राय गोयनका ने अपने उद्बोधन में कहा कि “जीव सेवा ही शिव सेवा है” के मूल मंत्र के साथ संस्था निरंतर समाज के प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक जीव के कल्याण के लिए कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि इस पृथ्वी पर मनुष्य, पक्षी और जलीय जीव सभी को समान रूप से जीने का अधिकार है, और इसी भावना से संस्था जनहित के कार्यों को आगे बढ़ा रही है।


गोयनका ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में विद्यालयों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल शुद्धिकरण यंत्र लगाए जाएंगे। साथ ही युवाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से किशोरों के बीच फुटबॉल और जर्सी का वितरण भी किया गया। उन्होंने आजाद हिंद पार्क के विकास तथा वहां डीप ट्यूबवेल स्थापित कराने का आश्वासन भी दिया।
गंगा मिशन द्वारा गंगा को अविरल और निर्मल बनाए रखने के उद्देश्य से जनजागरूकता अभियान, गोष्ठियां, सेमिनार, घाटों की सफाई, वृक्षारोपण और स्वास्थ्य शिविरों का नियमित आयोजन किया जाता है। वर्ष 2026-27 के लिए इन सभी गतिविधियों की औपचारिक शुरुआत ‘मीन मंगल उत्सव’ के माध्यम से की गई।


कार्यक्रम में निर्मला गोयनका, बांसबेड़िया नगरपालिका के अध्यक्ष तापस मुखर्जी, इंद्रजीत दत्ता, संदीप बजाज, अमित घोष, दीपक दा, काउंसलर सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति रही।
‘मीन मंगल उत्सव’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा, जिसने नववर्ष के अवसर को समाजहित के संकल्पों से सार्थक कर दिया।