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नई दिल्ली, 04 अगस्त । देश के पशुपालन क्षेत्र के लिए बड़ी खुशखबरी है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अफ्रीकी स्वाइन फीवर (एएसएफ) के खिलाफ भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन विकसित की है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को आईसीएआर के स्थापना दिवस समारोह में, इस वैक्सीन को राष्ट्र को समर्पित किया।

इस मौके पर केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह भी मौजूद रहे।

अफ्रीकी स्वाइन फीवर सूअरों में फैलने वाली बेहद घातक वायरल बीमारी है, जिसमें मृत्यु दर 100 प्रतिशत तक हो सकती है। भारत में यह बीमारी पहली बार वर्ष 2020 में सामने आई थी। इसके बाद कई राज्यों, खासकर पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर सूअरों की मौत हुई और हजारों पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जानकारी दी कि भारत में एएसएफ के फैलने का आर्थिक असर काफी ज़्यादा रहा है। 2020 और 2021 में असम में जब यह बीमारी पहली बार फैली, तो सूअरों की मौत और उन्हें मारने की वजह से लगभग 276 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। मिज़ोरम में, 2025 तक एएसएफ के फैलने से 11,382 से ज़्यादा परिवार प्रभावित हुए हैं, जिससे लगभग 982 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। इन घटनाओं ने बीमारी से निपटने की तैयारी को मज़बूत करने, किसानों की आजीविका की रक्षा करने और देश के सूअर पालन सेक्टर को मज़बूत बनाने के लिए एक असरदार घरेलू समाधान की तत्काल ज़रूरत को उजागर किया है।

आईसीएआर के अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान , भोपाल के वैज्ञानिकों ने एमए-104 सेल लाइन आधारित लाइव एटेन्यूएटेड एएसएफ वैक्सीन विकसित की है। यह वैक्सीन बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए उपयुक्त है और इससे निर्माण लागत भी कम होगी।

वैक्सीन का सुरक्षा, प्रभावशीलता, आनुवंशिक स्थिरता और फील्ड ट्रायल सहित सभी आवश्यक परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। इसे 8 सप्ताह से अधिक आयु के स्वस्थ सूअरों को 1 मि.ली. की खुराक के रूप में लगाया जाएगा तथा 14 दिन बाद बूस्टर डोज़ दी जाएगी।

आईसीएआर के मुताबिक इस वैक्सीन से सूअरों की मृत्यु दर में कमी आएगी, किसानों की आर्थिक हानि घटेगी और देश की जैव सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही, भारत सस्ती एएसएफ वैक्सीन के वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में भी उभर सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि पशु स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।