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आसनसोल, 11 जुलाई ।

आसनसोल नगर निगम की ओर से हाल ही में चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार की नगर विकास एवं नगर निगम मामलों की मंत्री अग्निमित्रा पाल ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को मंत्री एक बार फिर आसनसोल नगर निगम पहुंचीं और निगम के अधिकारियों के साथ इस पूरे मामले पर विस्तृत बैठक की।

बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में मंत्री ने कहा कि 9 जुलाई को नगर निगम में हुई समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया था कि सड़क किनारे लगी इक्का-दुक्का दुकानों को हटाने से पहले दुकानदारों को 15 दिनों का समय दिया जाए, ताकि वे स्वयं अपना सामान हटा सकें। लेकिन इसके विपरीत अगले ही दिन नगर निगम ने पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर बुलडोजर चलाते हुए कई दुकानों को हटा दिया, जिससे इलाके में तनाव और अशांति का माहौल बन गया।

अग्निमित्रा पाल ने कहा कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नगर निगम के तीन अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि अधिकारियों का जवाब मंत्रालय को संतोषजनक नहीं लगा तो उनके खिलाफ निलंबन (सस्पेंशन) जैसी कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

मंत्री ने कहा कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार संबंधित अधिकारी नगर निगम के प्रशासक अदिति चौधरी

और निगमायुक्त सुमन सौरभ मोहंती को पूरी तरह विश्वास में लिए बिना ही अतिक्रमण हटाने के अभियान पर निकल पड़े थे। ऐसे में उन्हें यह स्पष्ट करना होगा कि किस परिस्थिति में और किसके निर्देश पर यह कार्रवाई की गई।

उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि अधिकारियों ने जानबूझकर ऐसा किया होगा, लेकिन आखिर ऐसा क्यों हुआ, इसका उचित जवाब उन्हें देना होगा। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो कार्रवाई तय है।”

अग्निमित्रा पाल ने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पहले ही स्पष्ट निर्देश दे चुके हैं कि दुर्गा पूजा तक किसी भी हॉकर या छोटे दुकानदार को नहीं हटाया जाएगा। ऐसे में इस निर्देश के बावजूद अभियान क्यों चलाया गया, इसकी जांच कराई जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री के इस बयान के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर शुरू हुआ विवाद और गहरा गया है। अब सभी की नजर अधिकारियों के जवाब और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।