कोलकाता, 18 जुलाई । सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी (एसएनयू) के विधि विभाग और सिटिज़न्स फॉर जस्टिस (सी4जे) के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को “यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी)” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में न्यायपालिका, विधि विशेषज्ञों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर यूसीसी के संवैधानिक, ऐतिहासिक और न्यायिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम का उद्घाटन एसएनयू के कुलपति प्रो. अनुपम बसु ने किया। उन्होंने कहा कि बदलते कानूनी और संवैधानिक विषयों पर अकादमिक विमर्श विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण प्रदान करता है। कार्यक्रम की शुरुआत सिटिज़न्स फॉर जस्टिस के संयुक्त सचिव अधिवक्ता राजर्षि हलदार के स्वागत भाषण से हुई। इस अवसर पर संस्था के ट्रस्टी किंसुक पल्लव विश्वास भी उपस्थित रहे।
मुख्य वक्ता कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (डॉ.) सम्बुद्ध चक्रवर्ती ने यूनिफॉर्म सिविल कोड के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यूसीसी को लेकर वर्तमान समय में चल रही बहस केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक महत्व का विषय है। उन्होंने इसके ऐतिहासिक विकास, संवैधानिक दायित्व और वर्तमान परिदृश्य का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस विषय पर रचनात्मक संवाद आवश्यक है।
विधि विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) प्रेम कुमार अग्रवाल ने यूसीसी की दिशा में न्यायपालिका के महत्वपूर्ण पड़ाव विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न महत्वपूर्ण निर्णयों का उल्लेख करते हुए बताया कि न्यायालय समय-समय पर व्यक्तिगत कानूनों में समानता और सुधार की आवश्यकता पर बल देता रहा है। उन्होंने ट्रिपल तलाक मामले के फैसले और उसके कानूनी प्रभावों की भी व्याख्या की। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म व्यक्ति की आस्था का विषय है, जबकि कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समानता, न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करना है।
दोनों वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड का क्रियान्वयन व्यापक संवाद, सामाजिक सहमति तथा संविधान की प्रस्तावना में निहित न्याय, समानता और गरिमा के मूल्यों को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों और शिक्षकों ने प्रश्नोत्तर एवं संवाद सत्र में सक्रिय भागीदारी की, जिससे सेमिनार और अधिक सार्थक एवं जीवंत बन गया। अंत में विधि विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. (डॉ.) बन्हिता बोस ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए मुख्य अतिथियों, कुलपति, डीन, संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों तथा आयोजन से जुड़े सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
