नई दिल्ली, 18 अक्टूबर । तकनीकी सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, किफायती और बेहतर बनाने के साथ दिव्यांगजनों की सहायता के लिए नई तकनीक विकसित करने पर जोर दिया गया।
भारतीय सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (एसटीपीआई) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के नवाचार, उद्भवन एवं उद्यमिता केंद्र ने ‘स्वास्थ्य एवं सहायक प्रौद्योगिकियों के लिए एआई’ विषय पर तकनीकी सम्मेलन आयोजित किया। इसमें सरकारी प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्टार्टअप से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ाने और चिकित्सकीय निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने बीमारी की शुरुआती पहचान, चिकित्सकीय जांच, दूरस्थ गहन चिकित्सा इकाई की निगरानी और सर्जरी की योजना बनाने में एआई के उपयोग का उल्लेख किया। उन्होंने शोध, चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया।
एसटीपीआई महानिदेशक अरविंद कुमार ने स्वदेशी नवाचार, उद्यमिता और शोध को व्यावहारिक उत्पादों में बदलने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप युवाओं को रोजगार पाने के साथ रोजगार देने वाला बनने का अवसर भी प्रदान करते हैं। आईआईटी बीएचयू के निदेशक अमित पात्रा ने विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के विचारों को स्टार्टअप में बदलने तथा उन्हें वित्तीय सहायता से जोड़ने पर जोर दिया।
सम्मेलन में दो परिचर्चाओं के दौरान एआई आधारित स्वास्थ्य सेवाओं, समावेशिता और सहायक तकनीकों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने शोध को व्यावहारिक और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले समाधानों में बदलने के लिए सरकार, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य क्षेत्र और स्टार्टअप के बीच सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
