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कोलकाता, 22 नवम्बर । भारत निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में जारी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान संविदा कर्मचारियों की भागीदारी को लेकर एक बार फिर जिला मजिस्ट्रेटों को कड़ी चेतावनी जारी की है। आयोग की ओर से अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी जिलाधिकारियों, जो संबंधित जिलों के जिला निर्वाचन अधिकारी भी हैं, को नोट भेजकर स्पष्ट निर्देश दिया है कि एसआईआर के किसी भी चरण में संविदा कर्मियों को शामिल न किया जाए।

आयोग ने यह चेतावनी तब जारी की जब उसके संज्ञान में आया कि कुछ जिलाधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारी आयोग के निर्देशों का उल्लंघन करते हुए इस प्रक्रिया में संविदा कर्मचारियों को नियुक्त कर रहे हैं। नोट में कहा गया है कि संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर, अन्य संविदा कर्मचारी, बीएसके स्टाफ आदि को एसआईआर 2025 के लिए डेटा एंट्री कार्य में किसी भी स्थिति में लगाया नहीं जा सकता। आयोग ने इसे स्पष्ट उल्लंघन बताते हुए ऐसे मामलों में संबंधित डीईओ, ईआरओ और एईआरओ के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इस कदम का स्वागत करते हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आयोग का यह निर्देश अत्यंत महत्वपूर्ण है और इसे तत्काल लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आयोग के दिशा-निर्देश बिल्कुल स्पष्ट हैं और संविदा कर्मचारियों की भागीदारी किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है, इसलिए इस जानकारी को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि लोग संभावित उल्लंघनों के प्रति सतर्क रह सकें।

यह पहली बार नहीं है जब निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान संविदा कर्मचारियों की भूमिका को लेकर जिला निर्वाचन अधिकारियों को चेतावनी जारी की है। पिछले महीने भी आयोग ने पाराशिक्षकों को बूथ स्तर अधिकारी के रूप में नियुक्त किए जाने पर सावधानी बरतने का निर्देश दिया था।

तब आयोग ने पुनः यह याद दिलाया था कि उसके निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार केवल स्थायी राज्य सरकारी कर्मचारी तथा सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त करने वाले राज्य-संचालित स्कूलों के स्थायी शिक्षक ही बीएलओ नियुक्त किए जाने में प्राथमिकता प्राप्त करेंगे। केवल अपवादस्वरूप, जब ऐसे स्थायी कर्मचारी अन्यत्र तैनात हों, तभी संविदा कर्मचारियों को बीएलओ के तौर पर विचार किया जा सकता है, वह भी तभी जब मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से इसकी औपचारिक अनुमति प्राप्त हो।