कोलकाता में हृदय रोग पर जागरूकता संगोष्ठी
डॉ. अंजन सिओटिया ने दी स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ
कोलकाता, 7 सितम्बर। संस्कृति सौरभ संस्था ने अपने वार्षिक स्वास्थ्य-उन्मुख कार्यक्रम “आरोग्य धनसम्पदा – 4” का आयोजन इस बार हृदय रोग विषय पर केंद्रित किया। यह कार्यक्रम कोलकाता के आईसीसीआर सभागार में भव्य रूप से सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में जाने-माने हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजन सिओटिया उपस्थित रहे, जिन्होंने आधुनिक हृदय चिकित्सा से जुड़े अनेक पहलुओं पर डिजिटल प्रस्तुति दी। लगभग 1 घंटे तक चली इस प्रस्तुति में उन्होंने हार्ट अटैक के लक्षणों, कारणों, बचाव और उपचार की बारीकियों को सरल भाषा में श्रोताओं के सामने रखा।
हृदय रोग के लक्षण और सावधानियाँ
डॉ. सिओटिया ने अपने वक्तव्य की शुरुआत यह बताते हुए की कि हृदयाघात के शुरुआती संकेत अक्सर लोग साधारण बीमारी समझकर अनदेखा कर देते हैं। उन्होंने अपने एक डॉक्टर मित्र का उदाहरण दिया, जो पेट में दर्द को गैस समझकर 3 दिन तक साधारण दवाएँ लेते रहे, जबकि वास्तव में उन्हें गंभीर हार्ट अटैक आया था। बाद में बड़ी कठिनाई से उनकी जान बचाई जा सकी। उन्होंने कहा कि यदि किसी को छाती, पेट के ऊपरी हिस्से, हाथ, पीठ या जबड़े में असहनीय दर्द हो तो इसे कभी नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुँचकर ईसीजी कराएँ।
मधुमेह से पीड़ित लोगों को भी उन्होंने विशेष रूप से सतर्क रहने की सलाह दी, क्योंकि कई बार उन्हें सामान्य लक्षण नहीं दिखते। लेकिन अचानक पसीना आना, बेहोशी जैसा महसूस होना या चक्कर आना इस बात का संकेत हो सकता है कि हृदय में समस्या उत्पन्न हो रही है।
तंबाकू हृदय का सबसे बड़ा दुश्मन
डॉ. सिओटिया ने गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का और अन्य तंबाकूजन्य पदार्थों को हृदय का सबसे बड़ा दुश्मन बताया और कहा कि इनसे पूरी तरह दूरी बनाना आवश्यक है। शराब को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग पहले से ही सीमित मात्रा में नियमित सेवन करते हैं, उनके लिए वैज्ञानिक अध्ययनों में कुछ लाभ सामने आए हैं। लेकिन उन्होंने साफ कहा कि जो लोग नहीं पीते, उन्हें इसकी आदत डालने की आवश्यकता नहीं है।
हृदय रोग के वैश्विक परिदृश्य
प्रस्तुति के दौरान डॉ. सिओटिया ने हृदय रोग से जुड़े कई वैश्विक आंकड़े साझा किए।
- वर्ष 2021 में विश्वभर में लगभग 1 करोड़ लोगों की मृत्यु हृदय रोग के कारण हुई।
- इनमें से लगभग 80% मौतें विकासशील देशों में दर्ज की गईं।
- अनुमान है कि वर्ष 2030 तक यह संख्या बढ़कर 4 करोड़ तक पहुँच सकती है।
- हार्ट अटैक से पीड़ित 50% मरीज 4 सप्ताह के भीतर ही दम तोड़ देते हैं।
- इनमें से 2/3 लोगों की मृत्यु अस्पताल पहुँचने से पहले हो जाती है, 10-15% अगले 24 घंटे में और शेष 15-20% मरीज 28 दिनों के भीतर काल के गाल में समा जाते हैं।
- भारतीयों में हृदय रोग का खतरा यूरोप या अमेरिका के लोगों की तुलना में लगभग 70% अधिक है।
मधुमेह और रक्तचाप का प्रभाव
उन्होंने कहा कि मधुमेह से पीड़ित लोगों में दिल का दौरा पड़ने की संभावना सामान्य व्यक्तियों की तुलना में 2 से 3 गुना अधिक होती है। यदि वे शुगर को नियंत्रित भी रखें, तब भी हृदय रोग की आशंका बनी रहती है। ऐसे मरीजों के लिए रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का नियंत्रण सबसे अहम है।
रक्तचाप को लेकर उन्होंने बताया कि दुनिया में आधे लोग कभी जांच ही नहीं कराते। जो जांच कराते हैं, उनमें से आधे दवा शुरू नहीं करते और जो दवा लेते हैं उनमें से भी केवल आधे लोग ही नियमित रूप से उसका सेवन करते हैं। इस प्रकार दुनिया में केवल 6% लोग ही ऐसे हैं जो रक्तचाप को नियंत्रित रखने में सफल रहते हैं।
रोकथाम है सबसे अच्छा उपाय
डॉ. सिओटिया ने जोर देकर कहा कि रोकथाम ही इलाज से बेहतर है। उन्होंने कहा कि “हर दवा जहर है, जिसके कुछ न कुछ दुष्प्रभाव अवश्य होते हैं।” इसलिए पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से दूरी और तनावमुक्त जीवनशैली ही हृदय स्वास्थ्य का सबसे अच्छा विकल्प है। उन्होंने कहा—“अपने आलस्य को दवा का बहाना मत बनने दीजिए, मेहनत कीजिए और स्वस्थ रहिए।”
नई दवाएँ और तकनीकें
उन्होंने हाल में चर्चित दवा सीमाग्लूटाइड (Rybelsus) का उल्लेख किया, जो मधुमेह नियंत्रण, वजन घटाने और हृदय, किडनी तथा लिवर की सुरक्षा में कारगर सिद्ध हो रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति इसे 30-40 वर्ष तक लगातार ले तो इसके दीर्घकालीन दुष्प्रभावों का अभी पता नहीं है।
इसी तरह एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, सीआरटी, पेसमेकर और आईसीडी जैसे आधुनिक उपचारों पर भी उन्होंने विस्तार से चर्चा की।
प्रश्नोत्तर सत्र
कार्यक्रम के उपाध्यक्ष विनीत रूईया ने डॉक्टर सिओटिया से संवाद शैली में कई प्रश्न पूछे। कोविड-19 के बाद अचानक मौतों पर उन्होंने कहा कि इसे सीधे कोविड या वैक्सीन से जोड़ना वैज्ञानिक रूप से सिद्ध नहीं है।
“पेरिफेरल हार्ट” विषय पर उन्होंने बताया कि पिंडली की मांसपेशियाँ भी रक्त को हृदय तक पंप करने में अहम भूमिका निभाती हैं, इसलिए उन्हें शरीर का दूसरा हृदय कहा जाता है।
मुक्ता सरावगी ने पूछा कि यदि घर पर अकेले व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाए तो तत्काल क्या करना चाहिए? इस पर डॉक्टर ने कहा कि तुरंत एस्पिरिन की गोली लें और नजदीकी अस्पताल जाकर ईसीजी कराएँ। वहीं सॉरबिट्रेट की गोली बिना चिकित्सकीय परामर्श लेने से बचने की सलाह दी, क्योंकि यह रक्तचाप को खतरनाक स्तर तक गिरा सकती है।
आयोजन की सफलता और सम्मान
इस अवसर पर संस्था के सचिव बिमल नौलखा ने परिचय दिया, अध्यक्ष विजय कानोड़िया ने स्वागत भाषण रखा और संयोजक विनीत रूईया ने कार्यक्रम का संचालन किया। डॉक्टर सिओटिया का सम्मान अध्यक्ष इमेरिटस प्रमोद शाह, कोषाध्यक्ष जतनलाल बरड़िया, संयुक्त सचिव सुभाष सोंथलिया और अन्य पदाधिकारियों ने शॉल, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न भेंटकर किया।
संस्था के संरक्षक सदस्य हरिकिशन चौधरी, महावीर प्रसाद माणकसिया और सज्जन भजनका ने आयोजन की सराहना की। कार्यक्रम को सफल बनाने में सह संयोजक अशोक कुमार मूँधड़ा के साथ समिति के सदस्य शरिता बेंगानी, विकास रूँगटा, संदीप अग्रवाल, बृजेश हिम्मतरामका, सुमित झुनझुनुवाला, अनिल खेमका, प्रीति मूँधड़ा और अनुराधा रूईया का विशेष योगदान रहा।
