पूर्वी सिंहभूम, 21 जनवरी । पूर्वी सिंहभूम जिला में बुधवार को समाहरणालय सभागार में उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में जिला समन्वय समिति की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच बेहतर आपसी तालमेल स्थापित कर सरकार की कल्याणकारी योजनाओं एवं विकास कार्यों का प्रभावी, पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करना रहा।
बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, ग्रामीण विकास, तकनीकी विभागों, आपूर्ति, नगर निकाय, परिवहन सहित अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी, बीडीओ, सीओ एवं क्षेत्रीय अधिकारी उपस्थित थे।
उपायुक्त ने विभागवार योजनाओं की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर संवादहीनता या समन्वय की कमी के कारण योजनाओं की प्रगति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कई योजनाओं में एक से अधिक विभागों की भूमिका होती है, ऐसे में आपसी समन्वय और नियमित सूचना आदान-प्रदान अत्यंत आवश्यक है।
उपायुक्त ने आधारभूत संरचना निर्माण, भूमि हस्तांतरण, विद्युत संयोजन, भौतिक सत्यापन, लाभुक सत्यापन और भुगतान प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया। जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देशित किया गया कि जीरो ऑक्यूपेंसी, 50 प्रतिशत ऑक्यूपेंसी अथवा ऐसे छात्रावास जिनका संचालन तत्काल शुरू किया जा सकता है, उनका भौतिक सत्यापन कर कारणों सहित विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। वहीं, स्कूल भवन निर्माण और हैंडओवर से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर बीडीओ और सीओ की ओर से समन्वय बनाकर शीघ्र सुलझाने का निर्देश दिया गया।
मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत एक लाख से अधिक लाभुकों का भौतिक सत्यापन लंबित पाए जाने पर उपायुक्त ने नाराजगी जताते हुए सत्यापन कार्य शीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सत्यापन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनैतिक गतिविधि की शिकायत मिलने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए सेवा से हटाने तक का कदम उठाया जाएगा। इसके साथ ही जिन विभागों को विकास कार्यों के लिए अंचल से भूमि हस्तांतरित की जा चुकी है, उन स्थलों पर संबंधित विभागों को बोर्ड लगाने के निर्देश भी दिए गए।
आदिम जनजाति सबर परिवारों को लेकर कराए गए सर्वे की समीक्षा के दौरान उपायुक्त ने सभी बीडीओ को निर्देश दिया कि सबर समुदाय में ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या कम की जाए, उन्हें पुनः शिक्षा से जोड़ा जाए और प्रत्येक परिवार को सरकारी योजनाओं से आच्छादित करते हुए सैचुरेशन मोड में लाया जाए।
