जमशेदपुर, 19 जून। झारखंड में गंडा समाज को अनुसूचित जाति (एससी) का दर्जा देने की मांग को लेकर शुक्रवार को समाज के लोगों ने पूर्वी सिंहभूम उपायुक्त कार्यालय के समक्ष प्रदर्शन किया। इस दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए समुदाय को अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया है कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गंडा जाति को अनुसूचित जाति का दर्जा प्राप्त है, लेकिन झारखंड में समान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद इस समुदाय को अब तक एससी सूची में शामिल नहीं किया गया है। इसके कारण समाज के लोगों को जाति प्रमाण पत्र, छात्रवृत्ति, आरक्षण तथा विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
प्रदर्शन में शामिल समाज के लोगों ने कहा कि गंडा समाज लंबे समय से सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़ेपन का सामना कर रहा है। इसके बावजूद समुदाय को अनुसूचित जाति का दर्जा नहीं मिल पाया है। उन्होंने सरकार से इस दिशा में शीघ्र ठोस निर्णय लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे समाज के लोगों को संवैधानिक अधिकारों के साथ-साथ आरक्षण और अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा।
राज क्लब गंडा समाज के अध्यक्ष नरेश कुमार टांडिया ने बताया कि झारखंड के विभिन्न जिलों में गंडा समाज के लगभग डेढ़ लाख लोग निवास करते हैं। समाज के लोग वर्षों से अनुसूचित जाति का दर्जा दिए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि समुदाय के युवाओं और विद्यार्थियों को शिक्षा एवं रोजगार के क्षेत्र में अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि झारखंड राज्य के गठन के समय उन्हें उम्मीद थी कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी, लेकिन राज्य गठन के बाद भी उनकी स्थिति में कोई विशेष परिवर्तन नहीं आया। उन्होंने सरकार से गंडा समाज को जल्द से जल्द अनुसूचित जाति की सूची में शामिल करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की गई तो समाज के लोग लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि समुदाय के अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान नरेश कुमार टांडिया, फूलचंद राय, धर्मेंद्र दीप, हिरण बीथ, कृपा नाग, मोतीलाल करन, सुमित्रा सागर, शंकर टांडिया, रेखा महानंद, सागर सोना, सोनू सोना, मनोज नाग, बलराम टांडी, कार्तिक दीप, अरुण दीप, लक्ष्मी महानंद, गोरेश नाग, रेखो हर्षपाल, प्रिया नाग, अंजलि छत्तर, मदन कुमार, नवीन कुमार, हेमंत विश्वाल, सन्नी टांडी, दिलीप कुमार सुना, श्याम बारिक, आनंद नाग और गणेश नाग समेत बड़ी संख्या में समाज के महिला एवं पुरुष सदस्य उपस्थित थे।
