राजस्थान के जैसलमेर में हुई रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक
नई दिल्ली, 03 नवंबर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में सेनाओं के आधुनिकीकरण के लिए वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि इसी को ध्यान में रखते हुए हमने आधुनिकीकरण बजट को साल दर साल बढ़ाया और खर्च भी किया है। आज के बदलाव के समय में तकनीक युद्ध का अभिन्न अंग है। नए हथियारों और मिसाइलों का परीक्षण हो रहा है। सेनाएं भी अच्छी तरह समझती हैं कि सरकार उनकी जरूरतों के लिए प्रतिबद्ध है, इसीलिए वे अति महत्वपूर्ण चीजों को प्राथमिकता पर रखकर बजट का अच्छे से इस्तेमाल भी करती हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसा डिफेंस इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें हमारी सेनाओं की जरूरतों के अनुरूप तकनीक का विकास हो, भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश की रणनीतिक निर्भरता कम हो। आधुनिकीकरण का मतलब केवल नए हथियार और उपकरण खरीदना नहीं है। इसका मतलब है अपनी सेना की ऑपरेशनल तैयारी को मजबूत करना, उन्हें आधुनिक तकनीक से लैस करना और देश के भीतर ऐसी क्षमताओं का विकास करना, जिन पर हम लंबे समय तक भरोसा कर सकें। इसी दृष्टिकोण से आत्मनिर्भर भारत का हमारा संकल्प महत्वपूर्ण हो जाता है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में सामरिक स्वायत्तता और स्वदेशी तकनीकी क्षमता हमारी देनदारियां हैं।
उन्होंने कहा कि युद्ध में सफलता की सबसे बड़ी शक्ति हमारा मानव संसाधन है। जिस तेजी से दुनिया में युद्ध और युद्ध-लड़ने वाले सिस्टम में बदलाव आ रहा है, वह हमें इस बात पर भी विचार करने के लिए बाध्य कर रहा है कि हमारी सेनाएं और उनकी फॉर्मेशन भी आधुनिक युद्ध की पहुंच आवश्यकताओं के अनुरूप हों। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हमारी तीनों सेनाओं ने अपने स्ट्रक्चर और फॉर्मेशन में लगातार सुधार और बदलाव किए हैं। उदाहरण के लिए हमारी सेना में बनाई गईं असनी, भैरव और शक्तिबाण प्लाटून जैसी नई फॉर्मेशन आज की ऑपरेशनल जरूरतों और युद्ध की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप बहुत उपयोगी साबित हो रही हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि हथियारों और मिसाइलों के निर्माण में हमने प्राइवेट सेक्टर को बढ़ावा दिया है। लघु उद्योगों से लेकर बड़ी कंपनियां तक आज रक्षा क्षेत्र में योगदान दे रही हैं। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में हमारी प्रगति रक्षा उत्पादन और रक्षा निर्यात में भी दिखाई देती है। वित्त वर्ष 2014-15 में हमारा रक्षा उत्पादन 46,429 करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर रिकॉर्ड 1 लाख 78 हजार करोड़ रुपये हो गया। हमारा रक्षा निर्यात वर्ष 2014 में दो हजार करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब बढ़कर लगभग 40 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हमारा लक्ष्य वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये और रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाना है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में हमारा कुल रक्षा बजट बढ़कर 7 लाख 85 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इसमें आधुनिकीकरण और पूंजी खरीद के लिए 2 लाख 19 हजार करोड़ रुपये का पूंजी परिव्यय निर्धारित किया गया है। यह हमारी उस सोच को दिखाता है, जिसके तहत सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ भारतीय उद्योगों और घरेलू विनिर्माण को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। हमने आधुनिकीकरण बजट को साल दर साल बढ़ाया है और खर्च भी किया है। हमारा उद्देश्य केवल आधुनिक उपकरण हासिल करना नहीं, बल्कि एक ऐसा डिफेंस इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें हमारी सेना की क्षमताओं के अनुरूप तकनीक का विकास हो, भारतीय उद्योग की भागीदारी बढ़े और देश की अर्थव्यवस्था पर निर्भरता कम हो।–
