राज्‍यपाल संतोष कुमार गंगवार

ओंकार समाचार

जमशेदपुर, 8 सितंबर। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक यात्रा की समाप्ति नहीं, बल्कि नए जीवन की शुरुआत का प्रतीक है। वे मंगलवार को जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्‍होंने छात्राओं को जीवन में आगे बढ़ने का प्रेरक संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यह अवसर छात्राओं के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी गर्व का क्षण है।

राज्यपाल ने कहा कि डिग्री सफलता के अवसरों के द्वार खोल सकती है, लेकिन व्यक्ति की वास्तविक पहचान उसकी प्रतिभा, चरित्र और व्यवहार से बनती है। उन्होंने छात्राओं से शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान, चिकित्सा, उद्योग, खेल और सामाजिक सेवा सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी क्षमता का सर्वोत्तम प्रदर्शन करने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने नैतिक मूल्यों और संस्कारों को जीवनभर बनाए रखने की सलाह दी।

समारोह के दौरान विश्वविद्यालय की 1,990 छात्राओं को उपाधियां प्रदान की गईं। इस अवसर पर सीएसआईआर-एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधरी, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. इला कुमार, कुलसचिव डॉ. सलोनी कुजूर समेत कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

राज्यपाल ने छात्राओं को विफलताओं से निराश नहीं होने की सीख देते हुए कहा कि जीवन में हर प्रयास सफलता में नहीं बदलता, लेकिन चुनौतियां और असफलताएं ही आगे बढ़ने की नई सीख देती हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास और सकारात्मक सोच ही सफलता की कुंजी है।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति और ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति शिक्षा को केवल रोजगार तक सीमित नहीं रखती, बल्कि कौशल, नवाचार, शोध और रचनात्मकता को बढ़ावा देती है। देश के विकास में शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होगी।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड की बेटियां प्रतिभा और क्षमता से भरपूर हैं। उन्होंने छात्राओं से अपनी सफलता को समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि वे विश्वविद्यालय से केवल डिग्री लेकर नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संस्कार और बदलाव लाने के संकल्प के साथ निकलें।