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कोलकाता, 28 अक्टूबर। पश्चिम बंगाल विधानसभा में बुधवार को नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ ग्रहण समारोह के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के कड़े तेवर रहे। विधानसभा में रेजीनगर से नवनिर्वाचित भाजपा विधायक सखाराव सरकार और नंदीग्राम से विधायक हासीरानी रथ के शपथ ग्रहण समारोह में शिरकत करने के बाद मुख्यमंत्री ने एक तरफ जहां विपक्ष पर तीखे राजनीतिक प्रहार किए, वहीं राज्य में एक ही दिन में हुए दो पुलिस एनकाउंटर पर भी प्रशासन का रुख स्पष्ट किया।

शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम के लोगों ने उनसे अभिमान जताते हुए भवानीपुर सीट छोड़ने को कहा था। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बिना नाम लिए उन्होंने कहा कि जो उनसे दो बार हार चुकी हैं, उन्हें दोबारा चुनाव लड़ने का मौका मिल जाता, लेकिन लगभग 75 वर्ष की उम्र में अब उनके लिए चुनाव न लड़ना ही बेहतर है, अब उन्हें विश्राम करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए कहा कि फलता में देबांशु पांडा ने एक लाख नौ हजार वोटों से जीत दर्ज की है, जबकि विपक्षी वहां पूरी तरह से धराशायी हो गए। नंदीग्राम में भी एक उम्मीदवार मैदान से बाहर हो गया और दूसरा मात्र छह हजार वोटों तक सिमट कर रह गया। वो अपनी 10 हजार रुपये की ज़मानत तक नहीं बचा पाए। विधानसभा लाइव का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पहले पर्दे के पीछे से शपथ ग्रहण होता था, लेकिन अब जनता अपने चुने हुए प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण देखना चाहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के समय में चुनावों के दौरान टीवी पर हिंसा की जो घटनाएं दिखाई जाती थीं, वे अब पूरी तरह बंद हो गई हैं। रेजीनगर उपचुनाव में भाजपा की जीत का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यकों ने भाजपा को वोट देकर यह साबित कर दिया है कि भाजपा को सांप्रदायिक पार्टी बताने का मिथक अब टूट चुका है।

उन्होंने बताया कि चुनाव प्रचार के दौरान जस्मीना नाम की एक छोटी बच्ची की मौत हो गई थी, जिसके परिवार को चुनाव के बाद 10 लाख रुपये की सहायता दी गई। इसके अलावा 70 हजार महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिला है। शुभेंदु अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे हिंदू हैं और माथे पर तिलक लगाते हैं, लेकिन सरकार चलाने में जिसकी जो आवश्यकता होती है, उसे महत्व दिया जाता है और अल्पसंख्यक बहुल बूथों पर साखारव सरकार की जीत इसका प्रमाण है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि पिछले छह महीनों का काम केवल सुबह की ‘चाय-बिस्किट’ जैसा है, असली ‘ब्रेकफास्ट’ अभी बाकी है, लोग देखते रहें कि सबको साथ लेकर सरकार आगे कैसे काम करती है।

इसी दौरान, ऋतब्रत बनर्जी के दस्तावेज छीने जाने के आरोप पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई जाती है, तो इसकी जांच सीआईडी को सौंप दी जाएगी। उन्होंने नंदीग्राम की नवनिर्वाचित विधायक हासीरानी रथ के बेटे की नृशंस हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन यह जानना अभी बाकी है कि हत्या के लिए दो करोड़ रुपये की सुपारी किसने दी थी और यह पैसा कालीघाट से आया था या कमैक स्ट्रीट से।

दूसरी ओर, मंगलवार को राज्य में एक ही दिन में हुए दो एनकाउंटर (उत्तर 24 परगना के गाईघाटा में छात्रा से दुष्कर्म-हत्या के आरोपित और मुर्शिदाबाद के धुलियान में भाजपा नेता की हत्या के आरोपित की पुलिस मुठभेड़ में मौत) को लेकर दिल्ली से लौटे मुख्यमंत्री ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून अपने हाथ में लेगा या पुलिस पर हमला करेगा, तो पुलिस मूकदर्शक बनकर नहीं खड़ी रह सकती। राज्य में अब सही मायने में ‘कानून का शासन’ स्थापित हो गया है।

दरअसल, पिछले तीन महीनों में यह तीसरा एनकाउंटर है, और हर मामले में पुलिस का यही दावा रहा है कि आरोपितों ने पहले जांचकर्ताओं पर हमला किया था या भागने की कोशिश की थी।

मुख्यमंत्री ने राज्य की पुलिस को दो विशेष मामलों – नशामुक्ति अभियान और महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को रोकने – में कार्रवाई करने की पूरी छूट (फ्री हैंड) देने का ऐलान किया। उन्होंने आश्वस्त किया कि इन दोनों मामलों में परिस्थिति के अनुसार कार्रवाई करते समय यदि पुलिस अधिकारियों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ता है, तो गृह मंत्री के रूप में वह स्वयं उनके लिए ढाल बनकर खड़े रहेंगे। उन्होंने पश्चिम बंगाल को गुंडामुक्त बनाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि चूंकि देश के अधिकांश राज्यों में भाजपा सत्ता में है, इसलिए अपराधियों के छिपने के लिए अब कोई जगह नहीं बची है और उनके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही, चोरबागान हादसे पर भी मुख्यमंत्री ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि सरकार को इस घटना को स्वीकार करने में कोई आपत्ति नहीं है और भविष्य में ऐसी अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए दिए गए किसी भी सकारात्मक सुझाव का स्वागत है। हालांकि, उन्होंने सख्त चेतावनी दी कि चोरबागान घटना में मृतकों की संख्या को लेकर सोशल मीडिया पर जो भ्रामक और झूठा प्रचार किया जा रहा है, प्रशासन उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगा और अफवाह फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।