कोलकाता, 09 अक्टूबर ।
पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस ने तृणमूल कांग्रेस के दस बागी विधायकों की अयोग्यता से संबंधित याचिका में प्रक्रियात्मक त्रुटियों को दूर करने के लिए नई याचिका दायर करने का निर्देश दिया है। इन तकनीकी खामियों के चलते बागी विधायकों की सदस्यता रद्द करने के फैसले को फिलहाल लंबित रखा गया है।
इन दस बागी विधायकों के समूह में निष्कासित विधायक और बागी गुट के प्रमुख ऋतव्रत बनर्जी भी शामिल हैं, जो वर्तमान में विधानसभा में आधिकारिक तौर पर नेता प्रतिपक्ष (एलओपी) की भूमिका में हैं। गुरुवार को विधानसभा अध्यक्ष द्वारा इस मामले पर की गई अहम सुनवाई के बाद यह जानकारी सामने आई। हालांकि, सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि नई याचिका मांगने का मुख्य विषय यानी विधायकों की अयोग्यता के मूल आधार से कोई लेना-देना नहीं है।
जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट के वरिष्ठ विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा दायर मुख्य याचिका की जांच के दौरान यह पाया गया कि आवेदन तो निर्धारित नियमों के अनुसार था, लेकिन उसके साथ संलग्न दस्तावेजों की जांच और हस्ताक्षर तय मानकों के अनुरूप नहीं किए गए थे। पश्चिम बंगाल विधानसभा (दलबदल के आधार पर अयोग्यता) नियमों के तहत यह अनिवार्य है कि याचिका के साथ संलग्न प्रत्येक दस्तावेज के हर पृष्ठ पर हस्ताक्षर हों और उसका सत्यापन उसी तरह किया जाए जैसा कि मूल आवेदन में किया जाता है।
विधानसभा सूत्रों ने बताया कि अध्यक्ष ने पाया कि नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया था, इसलिए प्रक्रियात्मक त्रुटियों को सुधारने के लिए नई याचिका मांगी गई है। इस आदेश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अध्यक्ष ने 10 बागी विधायकों पर लगे दलबदल के आरोपों के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और न ही आरोपों के सही या गलत होने पर कोई टिप्पणी की है।
याचिकाकर्ता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को सभी कानूनी औपचारिकताओं और आवश्यक प्रपत्रों को विधिवत पूरा करते हुए नई याचिका दायर करने की छूट दी गई है।
