
हावड़ा, 30 दिसंबर। हावड़ा सत्संग समिति की ओर से फोरशोर रोड स्थित लक्ष्मी विलास गार्डन में आयोजित रामचरित मानस के सामूहिक पाठ के आठवें दिन सिंहस्थल पीठाधीश्वर महंत क्षमाराम महाराज ने पाठ से पूर्व सार में कहा कि जब काल(मौत) समीप होता है व्यक्ति को सच नहीं दिखता है न ही सही सलाह समझ में आती है। ऐसी स्थिति में उल्टा-पल्टा बोलता है।
मंदोदरी रावण को समझाती हुई कहती है कि हे नाथ- आप भगवान राम को साधारण तपस्वी समझने की भूल न करें,उन्हें सीमित दृष्टि से न देखें।भगवान राम जगत के मालिक हैं।उनके विराट स्वरूप को देखिए ताकि मेरा सौभाग्य बना रहे।
रावण कहता है,समझ गया तू डर गई। स्त्रियों में सदा आठ अवगुण मौजूद होते हैं। चिन्ता न करो। ऐसा कहकर वह दरबार में चला गया।इधर जामवंत ने राम से कहा कि अंगद को दूत बनाकर लंका भेजा जाए।यदि रावण समझ जाए तो युद्ध टल जाए क्योंकि युद्ध से विशेष किसी को लाभ नहीं होता।राम ने अंगद को समझाया,जाकर रावण से ऐसे ढंग से बात करना ताकि मेरा काज हो जाए और उसका(रावण)का हित भी हो जाए।अंगद ने रावण को खूब समझाया पर वह न समझ सका।अंत में अंगद ने पैर रोप दिया जिसे कोई उठा न सका।रावण पैर उठाने झुका तो अंगद ने कहा कि मेरे चरणों में नहीं भगवान के चरणों में झुको,तेरा कल्याण होगा।
फिर मंदोदरी रावण को समझाती हुई बोली,हे स्वामी !जिसने शिवजी के धनुष को तोड़ दिया,खर-दूषण व बाली को मार दिया,क्या वह नर है?राम नर नहीं साक्षात नारायण है।आपका यश युद्ध करने से नहीं भगवान का भजन करने से बढ़ेगा।जो राम विमुख होता है उसका परिणाम अच्छा नहीं होता।
कभी-कभी राक्षसी प्रवृतियां भी युद्ध जीतने के लिए यज्ञ का सहारा लेती हैं और यज्ञ करती हैं।राम-रावण युद्ध के बीच मेघनाथ और स्वयं रावण ने युद्ध का सहारा लिया पर उसे राम की सेना ने विध्वंस कर दिया था क्योंकि यह अपावन यज्ञ था।यज्ञ वही है जो लोक कल्याण के लिया किया जाता है।रामचरितमानस का
सामूहिक पाठ का आयोजन मनमोहन मल्ल एवं पवन पचेरिया के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया जा रहा है।इस अवसर पर पुरुषोत्तम पचेरिया,राजेश बंका,भरत जालान,मन्टुश पोद्दार,हरि भगवान तापड़िया की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।सूचना प्रसारण महावीर प्रसाद रावत ने किया।







