कोलकाता, 19 फरवरी । पश्चिम बंगाल में बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता को गांव-गांव तक पहुंचाने के उद्देश्य से महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री शशि पांजा ने कोलकाता से ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह रथ आठ मार्च तक राज्य के विभिन्न गांवों और कस्बों में घूमकर बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता फैलाएगा।
यह पहल जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन नामक संगठन के अभियान का हिस्सा है, जो देशभर में बाल विवाह रोकने के लिए काम कर रहा है। इस अभियान के तहत रथ पर बाल विवाह विरोधी संदेश, पोस्टर और शपथ हस्ताक्षर बोर्ड लगाए गए हैं। रथ मुख्य सड़कों से जुड़े इलाकों में चार पहिया वाहनों से पहुंचेगा, जबकि दूरदराज के गांवों तक मोटरसाइकिल और साइकिल के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इस अवसर पर शशि पांजा ने कहा कि राज्य सरकार बाल विवाह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कन्याश्री योजना जैसी सरकारी योजनाओं से लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा मिला है और बाल विवाह रोकने में मदद मिली है। उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य बाल विवाह मुक्त बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम में कोलकाता नगर निगम की पार्षद पूजा पांजा भी मौजूद थीं। आयोजन बिटान प्रशिक्षण जागरूकता एवं नेटवर्किंग संस्थान द्वारा किया गया था, जो बाल अधिकारों से जुड़े अभियानों में सक्रिय है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के अनुसार, पश्चिम बंगाल में बाल विवाह की दर अधिक रही है। इसे रोकने के लिए राज्य सरकार कन्याश्री प्रकल्प और रूपश्री योजना जैसी योजनाएं चला रही है। कन्याश्री योजना के तहत छात्राओं को शिक्षा जारी रखने के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है, जबकि रूपश्री योजना के तहत विवाह के समय आर्थिक अनुदान प्रदान किया जाता है।
अभियान से जुड़े प्रतिनिधियों ने कहा कि यह रथ पंचायतों, विद्यालयों, ग्राम सभाओं और धार्मिक संस्थानों तक पहुंचकर लोगों को जागरूक करेगा। नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जागरूकता संदेशों के माध्यम से समुदाय को बाल विवाह के दुष्परिणामों के बारे में बताया जाएगा। अभियान का समापन अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा।
अभियान से जुड़े संगठनों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में देशभर में एक लाख 98 हजार 628 बाल विवाह रोके गए, जिनमें से 11 हजार 938 मामले पश्चिम बंगाल के थे। इस अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030 तक बाल विवाह की प्रथा को समाप्त करना है।
