sena

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर मचाई थी तबाही

नई दिल्ली, 04 नवंबर। दुश्मन के सबसे मजबूत टैंकों को भी पलभर में नष्ट करने की क्षमता वाले घातक हथियार स्वदेशी नागास्त्र-1 एंटी-टैंक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम भारतीय सेना को मिल गए हैं। इसे बनाने वाली नागपुर की कंपनी सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने दूसरी खेप में 450 यूनिट सौंपी है। जीपीएस से लैस यह आत्मघाती ड्रोन दुश्मन के इलाके में घुसकर दो मीटर की दूरी पर सटीकता के साथ हमला करके तबाही मचा सकता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भी भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए नागास्त्र-1 का इस्तेमाल किया था।

भारतीय सेना 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग युद्ध सामग्री का ऑर्डर देकर अपनी सटीक हमला क्षमताओं को बढ़ा रही है। जीपीएस से लैस इन स्वदेशी ‘आत्मघाती ड्रोन’ में सटीकता के साथ हमले करने की क्षमता, उच्च ऊंचाई पर संचालन और दिन-रात निगरानी की सुविधा है। दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमलों के लिए डिजाइन किया गया यह हथियार देश के सैन्य ढांचे को और मजबूत करेगा। इस सिस्टम का परीक्षण लद्दाख और उत्तर प्रदेश में झांसी के पास बबीना सहित विभिन्न स्थानों पर किया गया है। आने वाले समय में ऐसे और भी अत्याधुनिक स्वदेशी हथियार सेना को मिल सकते हैं।

नागपुर की सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में निर्मित अत्याधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन नागास्त्र-1आर की पहली खेप जून 2024 में भारतीय सेना को सौंपी गई थी। सेना ने पहली खेप में मिले 120 हथियारों का इस्तेमाल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया था। इस हथियार की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए सेना ने अपनी सटीक हमला क्षमताओं को बढ़ाने, अपनी पैदल सेना को आधुनिक बनाने के लिए आपातकालीन खरीद शक्तियों के तहत 450 नागास्त्र-1आर लोइटरिंग युद्ध सामग्री का ऑर्डर दिया था, जिसकी आपूर्ति पिछले माह हुई है।

सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड में निर्मित लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम में 80 फीसदी से ज्यादा स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इसे आम भाषा में ‘घूमकर हमला करने वाला हथियार’ कहा जा सकता है, क्योंकि यह एक तरह से हवाई एंबुश यानी घात लगाकर हमला करता है। दुश्मन के इलाके में उड़कर पहुंचने के बाद यह लक्ष्य के ऊपर हवा में मंडराता है और जैसे ही सही मौका मिलता है। यह सटीक निशाना लगाकर दुश्मन को खत्म कर सकता है। खास बात यह है कि अगर हमला रद्द करना हो, तो इसे वापस भी बुलाया जा सकता है, जिससे यह दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।

कंपनी के मुताबिक नागास्त्र-1 को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के राडार की पकड़ में नहीं आता है। यह 4,500 मीटर से ज्यादा ऊंचाई से दुश्मन पर नजर रख सकता है। इसकी यह खूबी इसे दुश्मन के इलाके में गुपचुप पहुंचने और वहां से सुरक्षित हमले करने में मदद करती है। खासतौर पर आतंकवादियों के काफिले पर इसका इस्तेमाल कारगर हो सकता है। इसकी एंड्योरेंस यानी हवा में लगातार बने रहने की क्षमता 60 मिनट तक की है। यानी यह एक घंटे तक दुश्मन के इलाके में मंडरा सकता है और मौका मिलते ही हमला कर सकता है।

यह एक किफायती सिस्टम है, जिसमें लॉन्चर सिस्टम की पूरी तरह से दोबारा इस्तेमाल की जा सकने वाली खूबियां हैं। इस सिस्टम में 360 डिग्री का जिम्बल कैमरा लगा है और रात में ऑपरेशन करने के लिए थर्मल कैमरा लगाने का विकल्प भी है। यह एक आत्मघाती ड्रोन दुश्मन के इलाके में घुसकर तबाही मचा सकता है। जीपीएस से लैस यह ड्रोन दो मीटर की दूरी पर सटीकता के साथ हमला कर सकता है। इसे आसानी के साथ जमीन से लॉन्च किया जा सकता है। यह 1.5 किलोग्राम विस्फोटक वारहेड ले जाने में सक्षम है और 15 किमी. तक निगरानी करके आसानी से लक्ष्य भेद सकता है। इससे आतंकी लॉन्च पैड, घुसपैठियों और दुश्मनों के ट्रेनिंग कैंप पर सटीक हमले किये जा सकेंगे।