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कोलकाता, 13 फरवरी । पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले की एक अदालत ने कैंसर की वैकल्पिक चिकित्सा के विशेषज्ञ अरदीप चटर्जी को उनके पेशे से जुड़े कथित झूठे दावों के मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत के इस फैसले के बाद धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) से संबंधित विशेष अदालत ने भी उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से मुक्त कर दिया।

अरदीप चटर्जी को जून 2017 में इस आरोप में गिरफ्तार किया गया था कि वह कैंसर मरीजों का इलाज कर अवैध रूप से धन अर्जित कर रहे थे। उनके खिलाफ प्रतिरूपण कर धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और उकसावे सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। अगस्त 2017 में उनके पिता, होम्योपैथिक चिकित्सक असीम कुमार चटर्जी को भी कथित रूप से सहयोग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

राज्य पुलिस द्वारा दायर आरोपपत्रों के आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 2017 में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया था। इसके बाद उनकी संपत्तियां और बैंक खाते अटैच कर दिए गए थे तथा बिचार भवन स्थित विशेष ईडी अदालत में पीएमएलए की विभिन्न धाराओं के तहत अभियोजन शिकायत दायर की गई थी। अरदीप को जनवरी 2018 में जमानत मिल गई थी, जबकि उनके पिता को भी बाद में सक्षम अदालत से जमानत प्राप्त हुई।

मामले की सुनवाई के दौरान बारासात स्थित फास्ट ट्रैक-1 अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि अभियोजन पक्ष न्यूनतम संदेह से परे आरोप साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि “अभियोजन अपना मामला सिद्ध नहीं कर पाया है, अतः आरोपितों को बरी किए जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

इसके बाद कोलकाता के विचार भवन स्थित विशेष ईडी अदालत ने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दोनों को आरोपमुक्त कर दिया। विशेष अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब मूल आपराधिक मामले में सक्षम अदालत द्वारा आरोपितों को बरी कर दिया गया है, तो प्रस्तावित आरोप निराधार प्रतीत होते हैं।

अरदीप चटर्जी के वकीलों के अनुसार, ईडी और पुलिस द्वारा अपराध की आय बताकर अटैच की गई उनकी बचत राशि भी ब्याज सहित वापस कर दी गई है।

फैसले के बाद अरदीप चटर्जी ने न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए कहा कि यह निर्णय साबित करता है कि उन्होंने देश के सभी कानूनों का पालन किया। उन्होंने कहा कि यह उनके देश के मजबूत और प्रगतिशील संविधान की जीत है, जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है और न्याय सुनिश्चित करता है।