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कोलकाता, 23 जुलाई । मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी के परिणाम में कथित अंक गड़बड़ी को लेकर पश्चिम बंगाल की एक छात्रा ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। हुगली जिले के डानकुनी की परीक्षार्थी श्रेया महांति ने आरोप लगाया है कि उनकी ओएमआर शीट और आधिकारिक उत्तर पुस्तिका के बीच भारी विसंगति है। उन्होंने अपनी ओएमआर शीट के पुनः सत्यापन की मांग की है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से शीघ्र जवाब तलब किया है। अदालत ने कहा कि देशभर में मेडिकल प्रवेश की काउंसलिंग प्रक्रिया जारी है, इसलिए एनटीए को बिना देरी अपना पक्ष रखना होगा। मामले की अगली सुनवाई मंगलवार को होगी।

याचिकाकर्ता का दावा है कि 21 जून को आयोजित परीक्षा की आधिकारिक उत्तर पुस्तिका के अनुसार उन्हें 659 से 661 अंक मिलने चाहिए थे, लेकिन एनटीए द्वारा घोषित परिणाम में उन्हें केवल 289 अंक दिए गए। उनका आरोप है कि उनके वास्तविक और घोषित अंकों में लगभग 370 अंकों का अंतर है, जो मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता की ओर संकेत करता है।

नीट-यूजी परीक्षा कुल 720 अंकों की होती है। प्रत्येक सही उत्तर पर चार अंक और गलत उत्तर पर एक अंक काटा जाता है। प्रत्येक अभ्यर्थी को अलग-अलग क्रमांक वाली ओएमआर शीट दी जाती है और उसी के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है। एनटीए परीक्षा के बाद संबंधित उत्तर पुस्तिका भी जारी करता है। याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी ओएमआर शीट और संबंधित उत्तर पुस्तिका में स्पष्ट मेल नहीं है।

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सब्यसाची चटर्जी ने अदालत में दलील दी कि जब ओएमआर शीट का मूल्यांकन पूरी तरह कंप्यूटर आधारित होता है, तब 370 अंकों जैसी भारी त्रुटि सामान्य तकनीकी गलती नहीं हो सकती। उन्होंने आरोप लगाया कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता हुई है।

न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने एनटीए को निर्देश दिया कि वह अगली सुनवाई तक स्पष्ट करे कि अंक निर्धारण में इतनी बड़ी विसंगति कैसे हुई।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष नीट-यूजी परीक्षा और परिणाम को लेकर देश के विभिन्न राज्यों में कई शिकायतें सामने आई हैं तथा विभिन्न उच्च न्यायालयों में भी याचिकाएं दायर की गई हैं। अब इसी क्रम में कलकत्ता हाई कोर्ट में भी यह मामला पहुंचा है।