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दंतैल हाथी के आतंक से दहशत, वन विभाग हाई अलर्ट पर

पश्चिमी सिंहभूम, 08 जनवरी। पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों की बढ़ती गतिविधियों और लगातार हो रही हमले की घटनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने हाथियों की मौजूदगी की त्वरित सूचना देने के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया है, ताकि समय रहते कार्रवाई कर जान-माल के नुकसान को रोका जा सके।

जिला प्रशासन के अनुसार इन दिनों चाईबासा और कोल्हान वन प्रमंडल क्षेत्र में जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार देखी जा रही है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव, खेत, जंगल या रिहायशी इलाके के आसपास हाथी दिखाई दें, तो तुरंत 9835249408 नंबर पर सूचना दें। इस नंबर पर जितेंद्र सिंह, आरएफओ नोआमुंडी से संपर्क कर हाथियों की मौजूदगी की जानकारी साझा की जा सकती है।

दंतैल हाथी के आतंक से दहशत

इधर, जिले में एक भटके हुए दंतैल हाथी के आतंक से पूरे कोल्हान क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है। गोईलकेरा से लेकर टोंटो और नोआमुंडी तक जंगली व ग्रामीण इलाकों में इस हाथी द्वारा किए गए लगातार हमलों में अब तक करीब 20 लोगों की मौत की खबर सामने आई है। हाथी के असामान्य और अत्यंत आक्रामक व्यवहार को देखते हुए ग्रामीण इसे ‘आदमखोर’ हाथी कह रहे हैं।

वन विभाग के अनुसार यह दंतैल हाथी अपने झुंड से बिछड़ गया है और अत्यधिक उग्र अवस्था में है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हाथी एक घटना को अंजाम देने के बाद बेहद तेजी से स्थान बदल रहा है और रात के दौरान 30 से 40 किलोमीटर तक की दूरी तय कर ले रहा है, जिससे इसकी निगरानी और रोकथाम बड़ी चुनौती बन गई है।

प्रशासन और वन विभाग की युद्धस्तर पर कार्रवाई

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी के निर्देश पर जिले में युद्धस्तर पर कार्रवाई की जा रही है। आरसीसीएफ जमशेदपुर, सीएफ चाईबासा और सभी वन प्रमंडल पदाधिकारी जिला मुख्यालय में कैंप कर हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। पूरे प्रभावित क्षेत्र में थर्मल ड्रोन कैमरों से हाथी की गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।

हाथी के रिहायशी इलाकों में घुसने की आशंका को देखते हुए क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) को अलर्ट मोड में रखा गया है। ग्रामीण इलाकों में माइकिंग कर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों में टॉर्च और पटाखों का वितरण किया गया है तथा वन विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर हाथी से बचाव के उपायों की जानकारी दे रही हैं।

विशेषज्ञों की टीम तैनात

दंतैल हाथी को सुरक्षित तरीके से काबू में कर आबादी से दूर स्थानांतरित करने के लिए 4 जनवरी से पश्चिम बंगाल के अनुभवी विशेषज्ञों की टीम चाईबासा में डटी हुई है। वहीं हाथी को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित स्थान पर भेजने को लेकर गुजरात के जामनगर स्थित वनतारा से औपचारिक बातचीत शुरू की गई है। ओडिशा के क्योंझर से मोबाइल वेटरनरी यूनिट की टीम भी चाईबासा पहुंचकर चिकित्सकीय सहयोग दे रही है।

इसके अलावा वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, देहरादून के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि हाथी के व्यवहार का वैज्ञानिक विश्लेषण कर स्थायी समाधान निकाला जा सके। सीसीएफ वाइल्डलाइफ की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति मौके पर कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रही है, जबकि पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ स्वयं हालात की समीक्षा कर रहे हैं।

सतर्कता की अपील

वन विभाग ने बताया कि हाथियों के हमले में घायल लोगों का इलाज कराया जा रहा है और मृतकों के परिजनों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से जंगल या सुनसान इलाकों में न जाएं, रात के समय विशेष सतर्कता बरतें और वन विभाग व प्रशासन द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करें।