कोलकाता, 03 अक्टूबर । शिक्षा और विभिन्न नीतिगत मांगों को लेकर आगामी पांच अक्टूबर को जादवपुर विश्वविद्यालय के केपी बसु मेमोरियल हॉल में वामपंथी छात्र संगठनों की ओर से सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। ‘जेनजी आंदोलन : पीढ़ी और प्रतिरोध की एकता’ विषय पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम विभिन्न वामपंथी एवं छात्र संगठनों के नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। इसे लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी राजनीतिक नेताओं के प्रवेश और कार्यक्रम की अनुमति को लेकर सवाल उठाए हैं।
प्रस्तावित कार्यक्रम सोमवार दोपहर दो बजे केपी बसु मेमोरियल हॉल में होना है। आयोजकों की ओर से जारी पोस्टर में नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को समाप्त करने, स्कूल और शिक्षा को बचाने, एसआईआर को रद्द करने तथा आईएसआई विधेयक को रद्द करने जैसी मांगें उठाई गई हैं।
कार्यक्रम में आइसा की अखिल भारतीय अध्यक्ष नेहा, एसएफआई के अखिल भारतीय महासचिव सृजन भट्टाचार्य के अलावा विभिन्न वामपंथी एवं छात्र संगठनों के वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की बात कही गई है। सीजेपी के प्रतिनिधि और जादवपुर विश्वविद्यालय की शोधार्थी संगठन की सचिव आफरीन के भी उपस्थित रहने की जानकारी दी गई है। आफरीन पूर्व में बालीगंज विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ चुकी हैं।
वामपंथी छात्र संगठनों के इस कार्यक्रम को लेकर एबीवीपी ने विश्वविद्यालय प्रशासन के समक्ष आपत्ति जताने का निर्णय लिया है। जादवपुर विश्वविद्यालय एबीवीपी इकाई के अध्यक्ष निखिल दास ने कहा कि संगठन अपने कार्यक्रम कर सकता है, लेकिन परिसर में बाहरी राजनीतिक लोगों को लाकर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विश्वविद्यालय और उच्च न्यायालय के भी निर्धारित परिपत्र एवं आदेश हैं।
निखिल दास ने कहा कि बाहरी लोगों को लाकर कार्यक्रम किस प्रकार आयोजित किया जा रहा है और इसकी अनुमति किसने दी है, इन सवालों को लेकर एबीवीपी सोमवार को विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र देगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल इस कार्यक्रम के जवाब में किसी प्रतिवाद कार्यक्रम की योजना नहीं है।
उल्लेखनीय है कि कुछ समय पहले जादवपुर विश्वविद्यालय के त्रिगुणा सेन सभागार में ‘हरिपद भारती स्मृतिरक्षा समिति’ की ओर से आयोजित एक राष्ट्रवादी सम्मेलन को लेकर परिसर में विवाद हुआ था। उस समय विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा था कि उच्च न्यायालय के आदेश और निर्धारित नियमों के अनुसार ही परिसर में कार्यक्रम तथा सभागार की बुकिंग से संबंधित निर्णय लिए जाएंगे।
