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कूचबिहार, 25 अक्टूबर । कूचबिहार में भगवान मदनमोहन के ऐतिहासिक रास उत्सव में धार्मिक सद्भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। यहां 200 साल से भी अधिक पुरानी परंपरा के तहत एक मुस्लिम परिवार रास उत्सव के मुख्य आकर्षण 34 फीट ऊंचे रास चक्र का निर्माण करता आ रहा है। इस वर्ष चौथी पीढ़ी के अमिनुर हुसैन इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।

कूचबिहार के हरिणचौड़ा इलाके में तोर्सा नदी के किनारे स्थित अपने घर पर अमिनुर बांस, कागज, गोंद और धागे की मदद से रास चक्र तैयार कर रहे हैं। धार्मिक परंपराओं और तिथि का पालन करते हुए उन्होंने लक्ष्मी पूजा के दिन से ही इसका निर्माण शुरू किया है। इस काम में करीब एक महीने का समय लगेगा।

देवत्र ट्रस्ट बोर्ड के अनुसार, आगामी 24 नवंबर को कूचबिहार के मदनमोहन मंदिर में रास उत्सव शुरू होगा। रात 9 बजे जिलाधिकारी और देवत्र ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष इस रास चक्र को घुमाकर उत्सव का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।

इतिहास के अनुसार, महाराजा हरेंद्र नारायण के शासनकाल में 200 साल से भी पहले भेटागुड़ी में इस उत्सव की शुरुआत हुई थी। बाद में धलुआबाड़ी होते हुए 1890 में वर्तमान मदनमोहन मंदिर में इसे स्थायी रूप मिला। शुरुआत से ही अमिनुर के पूर्वज इस रास चक्र का निर्माण करते आए हैं। उनके दादा के पिता पान मोहम्मद मियां के बाद उनके पिता अल्ताफ मियां ने यह परंपरा निभाई और अब पिछले चार वर्षों से अमिनुर इसे आगे बढ़ा रहे हैं।

अमिनुर हुसैन का कहना है कि यह उनके परिवार की विरासत और बड़ी जिम्मेदारी है। वह सभी नियमों का पालन करते हुए पूरी श्रद्धा से रास चक्र तैयार कर रहे हैं। हालांकि, मौजूदा समय में इस काम से मिलने वाले पारिश्रमिक को लेकर उन्हें चिंता है कि भविष्य में इस प्राचीन कला और परंपरा को बनाए रखना कितना संभव होगा।

कूचबिहार का यह रास उत्सव आज भी धर्म और समुदाय की सीमाओं से ऊपर उठकर हिंदू-मुस्लिम सांस्कृतिक एकता और आपसी सद्भाव का जीवंत उदाहरण बना हुआ है।