chunavb

हुगली, 02 अप्रैल। पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला कर रहे राजनीतिक दलों के लिए जूट मिल श्रमिक बेहद महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। भाजपा और तृणमूल कांग्रेस—दोनों ही पार्टियां इस औद्योगिक क्षेत्र के श्रमिकों को अपने पक्ष में करने की कोशिश में सक्रिय नजर आ रहे हैं।

बुधवार को भाजपा उम्मीदवार भास्कर भट्टाचार्य ने रिषड़ा के संध्या बाजार में पहुंचकर जूट मिल श्रमिकों का अभिवादन किया और उनसे भाजपा के पक्ष में मतदान करने की अपील की। इसके अगले ही दिन गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार तन्मय घोष ने बंद पड़े जूट मिलों को पुनः खोलने की मांग को लेकर श्रमिकों के साथ रैली निकाली और संबंधित विभाग को ज्ञापन सौंपा।

श्रीरामपुर और उसके आसपास का क्षेत्र लंबे समय से जूट उद्योग का प्रमुख केंद्र रहा है। श्रीरामपुर में स्थित कई मिलों ने हजारों परिवारों की आजीविका को सहारा दिया है।

उल्लेखनीय है कि श्रीरामपुर विधानसभा क्षेत्र में हेस्टिंग्स, वेलिंगटन और श्रीरामपुर की जूट मिलें प्रमुख रूप से मौजूद हैं, जहां हजारों श्रमिक काम करते हैं। ये श्रमिक बड़ी संख्या में इस क्षेत्र में निवास करते हैं, जिससे यह एक प्रभावशाली वोट बैंक बनता है। माना जा रहा है कि जूट श्रमिकों का एकमुश्त वोट श्रीरामपुर के चुनाव परिणाम को किसी भी दिशा में मोड़ सकता है।

बंद मिलें, अनियमित रोजगार और कम आय जैसे मुद्दे यहां के श्रमिकों की सबसे बड़ी चिंताएं हैं। यही कारण है कि “मिलों को पुनः खोलना” इस चुनाव में एक केंद्रीय मुद्दा बन गया है। जहां एक ओर भाजपा श्रमिकों के बीच सीधे संपर्क और समर्थन जुटाने पर जोर दे रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस रोजगार और उद्योग पुनर्जीवन के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रही है।

ऐसे में श्रीरामपुर का चुनाव केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं, बल्कि जूट उद्योग के भविष्य और हजारों श्रमिक परिवारों की आजीविका से जुड़ा एक महत्वपूर्ण जनमत भी बनता जा रहा है।