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कोलकाता, 19 फ़रवरी। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पश्चिम बंगाल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी के साथ अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ अपने मुख्य राजनीतिक हथियार के रूप में उभार रही है।

पार्टी का कहना है कि राज्य से बड़ी संख्या में बाहर काम करने जाने वाले मजदूरों में अल्पसंख्यक समुदाय की हिस्सेदारी अधिक है, जिसे वह रोजगार और सामाजिक विकास के सवाल से जोड़कर चुनावी मुद्दा बना रही है।

एआईएमआईएम नेतृत्व ने मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे अल्पसंख्यक बहुल जिलों के साथ-साथ कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, नदिया, उत्तर एवं 24 परगना और हावड़ा के कई विधानसभा क्षेत्रों में अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच अभियान शुरू कर दिया है।

पार्टी के एक राज्य नेता के अनुसार, बड़ी संख्या में अल्पसंख्यक प्रवासी मजदूरों का होना इस बात का संकेत है कि राज्य सरकार मुस्लिम युवाओं के लिए रोजगार सृजन और सामाजिक-आर्थिक विकास को लेकर गंभीर नहीं रही। उनका दावा है कि इसी मुद्दे को लेकर पार्टी मतदाताओं को जागरूक कर रही है और इसे सत्तारूढ़ दल के “अल्पसंख्यक हितैषी” दावे के विपरीत वास्तविक स्थिति बताने की कोशिश कर रही है।

पार्टी नेताओं का कहना है कि इस अभियान का असर कुछ जिलों और क्षेत्रों में दिखने लगा है, जहां ऐसे प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों के सदस्य, जो 2011 से तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे, अब एआईएमआईएम में शामिल हुए हैं। उनका तर्क है कि मुस्लिम युवाओं को प्रतीकात्मक राजनीति से ज्यादा रोजगार के अवसरों की जरूरत है, जो मौजूदा शासन में संभव नहीं दिखते।

सूत्रों के अनुसार, एआईएमआईएम का इस साल प्रस्तावित पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जनता उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ना लगभग तय माना जा रहा है। यह नई पार्टी निलंबित तृणमूल विधायक हुमायूं कबीर ने बनाई है। साथ ही एआईएमआईएम वाम दलों के साथ समझौते के विकल्प के लिए भी खुली है, हालांकि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे की ओर से इस संबंध में अभी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है।