बाबूलाल

रांची, 04 फरवरी। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी का कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन ने झारखंड को दिवालियेपन की कगार पर ला खड़ा कर दिया है। मरांडी ने अपने सोशल मीडिया पोस्‍ट में लिखा है कि झारखंड के शिक्षा विभाग के पास वेतन देने तक के लिए बजट नहीं बचा है।,

स्थिति यह है कि राज्य के 10 जिलों में हाई स्कूल शिक्षकों को पिछले 6 महीनों से वेतन नहीं मिला, जबकि 161 शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन का 6.18 करोड़ रुपये बकाया है। छात्रों की छात्रवृत्ति, पोशाक योजना, मिड-डे मील, किताबें और अन्य शैक्षणिक योजनाएं भी बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।

राज्य का खजाना खाली हो चुका है। विकास योजनाओं के नाम पर लूट, कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार ने झारखंड को इस स्थिति में पहुंचा दिया है।

ऊर्जा विभाग के खाते से 100 करोड़ की डकैती हो चुकी है। कुल मिलाकर झारखंड सरकार के खजाना का ₹10,000 करोड़ कहाँ गया, इसका पता नहीं चल रहा।

जब तक शिक्षकों के वेतन का भुगतान नहीं हो जाता, तब तक मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के वेतन पर भी रोक लगाई जानी चाहिए।