
सुकमा, 30 जनवरी । छत्तीसगढ़ राज्य के सुकमा जिले के किस्टाराम एरिया कमेटी में सक्रिय 8 लाख रुपये के इनामी चार माओवादी कैडरो ने शुक्रवार काे ऑटोमैटिक हथियार पुलिस अधिकारियों काे साैंप कर आत्मसमर्पण किया है। इनमें दाे महिला नक्सली शामिल हैं।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुकमा पुलिस एवं आंध्र प्रदेश के अल्लूरि सीताराम राजू जिला पुलिस के संयुक्त प्रयासों से “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” अभियान के अंतर्गत बस्तर रेंज पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम, पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण, पंकज मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अल्लूरि सीताराम राजू (आंध्रप्रदेश), रोहित शाह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुकमा, 2Iसी कोंटा रेंज सीआरपीएफ अरविंद पी. आनंद के समक्ष दक्षिण बस्तर डिविजन अंतर्गत कोंटा किस्टाराम एरिया कमेटी में सक्रिय कुल 8 लाख रुपये के इनामी चार माओवादी कैडरों ने आत्मसमर्पण किया है।
इन नक्सलियों में एसीएम सोढ़ी जोगा, निवासी सिंघनमड़गू, थाना किस्टाराम, जिला सुकमा, डाबर गंगा उर्फ मड़कम गंगा निवासी सिंगाराम, गोलापल्ली, सोढ़ी राजे गोलापल्ली एलओएस सदस्य निवासी एंटापाड़, थाना चिंतागुफा, जिला सुकमा और माड़वी बुधरी, गोलापल्ली एलओएस सदस्य निवासी सिंघनमड़गू, थाना किस्टाराम, जिला सुकमा शामिल हैं। इनमें साेढ़ी जाेगा पर पांच लाख रुपये
का इनाम है। इसके अलावा डाबर गंगा पर एक लाख, साेढ़ी राजे पर एक लाख और माड़वी बुधरी पर एक लाख रुपये का इनाम है। इन लाेगाें ने अपनी एसएलआर रायफल सहित कई खतरनाक हथियार पुलिस काे साैंप दिए हैं।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक सुकमा किरण चव्हाण ने कहा कि हम शेष बचे माओवादी कैडरों से भी अपील करते हैं कि वे जल्द से जल्द हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और शासन की पुनर्वास योजना का लाभ उठाकर अपने जीवन की नई शुरुआत करें।
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पट्टलिंगम ने बताया कि आज सुकमा जिले में ‘पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के अंतर्गत चार सक्रिय माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति को अपनाया है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि माओवादी संगठन तेजी से समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। सुदूर अंचलों में स्थापित सुरक्षा कैम्पों, बेहतर सड़क कनेक्टिविटी, लगातार सफल नक्सल विरोधी अभियानों तथा विकास योजनाओं की प्रभावी पहुंच से संगठन का आधार क्षेत्र सिमट गया है और शासन-प्रशासन के प्रति जन-विश्वास मजबूत हुआ है। उन्होंने शेष बचे कैडरों से अपील की कि हिंसा में केवल विनाश है, जबकि ‘पूना मारगेम’ अभियान शांति, सकारात्मक जीवन निर्माण और सम्मानजनक जीवन का अवसर प्रदान करता है—हथियार छोड़ें, मुख्यधारा में लौटें; आपके सुरक्षित भविष्य और सकारात्मक जीवन निर्माण की जिम्मेदारी शासन और समाज की है।






