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कोलकाता, 27 जनवरी । पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला पहले से विचाराधीन है। इसी बीच इस मुद्दे पर कलकत्ता हाईकोर्ट में मंगलवार को एक नई याचिका दायर की गई है। याचिका में एसआईआर प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि रिवीजन कराने के लिए कोई ठोस और स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है।

मंगलवार सुबह याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने इस विषय को न्यायमूर्ति कृष्णा राव के संज्ञान में लाया, जिसके बाद याचिका दाखिल करने की अनुमति दी गई। अदालत सूत्रों के अनुसार, इस मामले की सुनवाई छह फरवरी को हो सकती है।

याचिका में दावा किया गया है कि एसआईआर के नाम पर आम लोगों को अनावश्यक परेशान किया जा रहा है और छोटे-छोटे मामलों में भी लोगों को सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है। इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस पहले भी कई बार आपत्ति जता चुकी है। राज्य के प्रशासनिक प्रमुख द्वारा राष्ट्रीय चुनाव आयोग को इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कई पत्र भी भेजे गए हैं।

एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ की सूची सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था और इस संबंध में कई अहम आदेश भी पारित किए थे। इसी पृष्ठभूमि में अब कलकत्ता हाईकोर्ट में नई याचिका दायर होने से यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।

हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि स्पेशल रिवीजन कराने का आधार क्या है, इस संबंध में अब तक कोई दस्तावेज या कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि कानून के तहत रिवीजन के लिए ठोस कारण बताना अनिवार्य है, लेकिन न तो ऐसे कारण सामने रखे गए हैं और न ही कोई आधिकारिक दस्तावेज जारी किया गया है।

याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि इस मुद्दे पर संबंधित प्राधिकरण से सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी गई थी। सूचना आयोग ने चुनाव आयोग को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया था, इसके बावजूद अब तक कोई दस्तावेज या जानकारी प्रदान नहीं की गई।

इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता ने कलकत्ता हाईकोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में क्या रुख अपनाती है और आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है।