झारखंड में नगर निकाय चुनाव

रांची, 27 जनवरी।  झारखंड में शहरी लोकतंत्र की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने लंबे समय से लंबित नगर निकाय चुनावों की औपचारिक घोषणा कर दी है। राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने रांची में आयोजित प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि राज्य के सभी 48 नगर निकायों में एक ही चरण में 23 फरवरी को मतदान कराया जाएगा, जबकि 27 फरवरी को मतगणना होगी। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही राज्य के सभी नगर निकाय क्षेत्रों में आदर्श आचार संहिता तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई है।

राज्य निर्वाचन आयोग के इस फैसले से वर्षों से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अभाव में संचालित हो रहे शहरी निकायों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पुनर्बहाली का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

वर्षों बाद बहाल होगा शहरी लोकतंत्र

झारखंड में नगर निकाय चुनाव वर्ष 2020 से लंबित थे। पहले कोरोना महामारी के कारण चुनाव प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी, वहीं बाद के वर्षों में ओबीसी आरक्षण, ट्रिपल टेस्ट और इससे जुड़े कानूनी विवादों ने चुनाव की राह में लगातार अड़चनें पैदा कीं।

राज्य सरकार द्वारा ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी किए जाने और हाईकोर्ट द्वारा नगर निगमों के वर्गीकरण एवं मेयर पद के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज किए जाने के बाद चुनाव कराने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी।

48 नगर निकायों में एक साथ चुनाव

इन चुनावों के तहत राज्य के कुल 48 शहरी स्थानीय निकायों में मतदान कराया जाएगा। इनमें –

9 नगर निगम,

20 नगर परिषद,

19 नगर पंचायत शामिल हैं।

नगर पालिका क्षेत्रों में कुल 43 लाख 33 हजार 574 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इनमें 22 लाख 7 हजार 203 पुरुष, 21 लाख 26 हजार 227 महिला और 144 ट्रांसजेंडर मतदाता शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि इस बार नगर निकाय चुनाव में नोटा का विकल्प उपलब्ध नहीं रहेगा।

चुनाव कार्यक्रम पर एक नजर

28 जनवरी : चुनाव की अधिसूचना जारी

29 जनवरी से 4 फरवरी : नामांकन पत्र दाखिल

5 फरवरी : नामांकन पत्रों की जांच

6 फरवरी : नामांकन वापसी की अंतिम तिथि

7 फरवरी : चुनाव चिन्हों का आवंटन

23 फरवरी : मतदान (सुबह 7 बजे से शाम 5 बजे तक)

27 फरवरी : मतगणना

आरक्षण व्यवस्था से सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व

नगर निकाय चुनावों में मेयर, अध्यक्ष और वार्ड प्रतिनिधियों के पदों के लिए विस्तृत आरक्षण व्यवस्था लागू की गई है। नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग, महिला एवं अनारक्षित श्रेणी के अनुसार पद आरक्षित किए गए हैं। इससे शहरी स्थानीय निकायों में सभी सामाजिक वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित होगी।

चुनावी खर्च की सीमा तय

राज्य निर्वाचन आयोग ने उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा भी निर्धारित कर दी है।

10 लाख या उससे अधिक आबादी वाले नगर निगमों में महापौर/अध्यक्ष पद के लिए अधिकतम 25 लाख रुपये, जबकि वार्ड पार्षद के लिए 5 लाख रुपये खर्च किए जा सकेंगे।

10 लाख से कम आबादी वाले नगर निगमों में यह सीमा क्रमशः 15 लाख रुपये और 3 लाख रुपये तय की गई है।

नगर परिषद और नगर पंचायत क्षेत्रों में भी जनसंख्या के आधार पर खर्च की सीमा निर्धारित की गई है।

सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी पूरी

चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने के लिए राज्यभर में 4304 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जो 2129 भवनों में स्थित होंगे। सभी मतदान केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में सुरक्षा बलों, सामान्य पर्यवेक्षकों और खर्च पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी।

नगर निकाय चुनावों की घोषणा के साथ ही झारखंड की शहरी राजनीति में नई हलचल तेज हो गई है। इन चुनावों के माध्यम से शहरी विकास, आधारभूत संरचना, स्वच्छता, पेयजल और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर स्थानीय नेतृत्व को निर्णायक भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।