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दक्षिण दिनाजपुर, 25 जनवरी । जमीन अधिग्रहण हो चुका है, लेकिन अब तक एक पैसा भी मुआवजा नहीं मिला है। इसी आरोप को लेकर हिली–बालुरघाट रेल विस्तार परियोजना का काम रोकते हुए एक किसान ने रेलवे की जमीन पर बांस की बाड़ लगा दी। घटना हिली थाना क्षेत्र के श्यामपुर गांव की है। इस घटना से इलाके में हलचल मच गई। जमीन विवाद के चलते परियोजना का काम रुकने से रेलवे की ठेका एजेंसी को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, साल 2022 में कोलकाता हाईकोर्ट के निर्देश पर बालुरघाट से हिली तक रेल लाइन विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी। पिछले साल जून में जिला भूमि अधिग्रहण विभाग ने जमीन रेलवे को सौंप दी, जिसके बाद पुल निर्माण और मिट्टी भरने का काम तेजी से चल रहा था। लेकिन श्यामपुर गांव पहुंचते ही पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे को विरोध का सामना करना पड़ा।

स्थानीय किसान निखिल सिंह का दावा है कि रेलवे परियोजना के लिए उनकी लगभग 70 सेंट जमीन अधिग्रहित की गई, लेकिन आज तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला। उनका आरोप है कि वर्ष 2023 में धोखाधड़ी कर उनकी रिकॉर्ड में दर्ज जमीन किसी अन्य व्यक्ति के नाम कर दी गई। उसी तीसरे व्यक्ति द्वारा मुआवजे का दावा किए जाने के कारण उनका भुगतान रोक दिया गया है। इसी के विरोध में उन्होंने अपनी जमीन के चारों ओर बांस की बाड़ लगाकर रेलवे का काम बंद करा दिया।

वहीं, जिन पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है, उस स्थानीय निवासी नूरुल इस्लाम मंडल का कहना है कि यह जमीन वास्तव में वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और बोर्ड ने उन्हें उसका मोतोवाली (प्रबंधक) नियुक्त किया है। आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, वक्फ बोर्ड की जमीन में कोई धोखाधड़ी संभव नहीं है। मेरे खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं। पूरे मामले की जानकारी मैं वक्फ बोर्ड को दूंगा।

ज़मीन दाता और दावेदार के बीच चल रहे इस विवाद के कारण रेलवे परियोजना का काम ठप पड़ा है, जिससे ठेका एजेंसी चिंतित है। निखिल सिंह ने साफ कहा है कि जब तक मुझे जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक रेलवे का कोई काम नहीं होने दूंगा।

इस तरह एक महत्वपूर्ण रेल विस्तार परियोजना के रुक जाने से आम लोगों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।