कोलकाता, 24 अक्टूबर।
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारद्वत मुखोपाध्याय ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए राज्य के सरकारी अस्पतालों में चली आ रही दशकों पुरानी छुट्टियों की परंपरा को समाप्त करने की घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगले साल की दुर्गा पूजा से सरकारी अस्पतालों के किसी भी कर्मचारी को षष्ठी से कोजागरी लक्ष्मी पूजा तक (लगभग 10 दिन) की लंबी छुट्टी नहीं मिलेगी।
शुक्रवार रात स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वास्थ्य विभाग राज्य के अन्य सामान्य सरकारी विभागों की तरह नहीं है, बल्कि यह एक अति आवश्यक और आपातकालीन सेवा है, जो सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ी है। उन्होंने बताया कि साल 1947 में आजादी के बाद से ही राज्य में यह अघोषित परंपरा सी बन गई थी कि षष्ठी आते ही कार्यालयों और अस्पतालों में छुट्टी का माहौल बन जाता था, और यह सिलसिला सीधे लक्ष्मी पूजा तक चलता था। शारद्वत मुखोपाध्याय ने कड़े शब्दों में कहा, “षष्ठी से लक्ष्मी पूजा तक छुट्टी लेने की इस पुरानी प्रथा को अब हमेशा के लिए बंद किया जाना चाहिए। इतने लंबे समय से जो भी परंपरा चली आ रही थी, वह अब और नहीं चलेगी।” उन्होंने आगे कहा कि अगले साल से केवल सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी के चार मुख्य पूजा के दिनों के लिए ही एक विशेष ड्यूटी रोस्टर तैयार किया जाएगा।
इस साल भी इसी नई व्यवस्था को लागू करते हुए, मंत्री ने आदेश दिया है कि जो लोग छुट्टियों पर थे, उनकी छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं और उन्हें काम पर लौटने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने संतुष्टि जताते हुए कहा कि मेडिकल कॉलेजों के शिक्षक, प्रिंसिपल, एमएसवीपी, नॉन-मेडिकल सुपरिटेंडेंट से लेकर सफाई कर्मचारी तक, सभी अन्य सरकारी विभागों की तरह काम पर लौट आए हैं।
इसके अलावा, स्वास्थ्य मंत्री ने सरकारी अस्पतालों में कर्मचारियों की उपस्थिति के लिए ‘विशेष रोस्टर’ प्रणाली का विवरण भी दिया। उन्होंने कहा कि इस बार से ही पूजा के चार दिनों के लिए यह रोस्टर लागू किया गया है। अगले साल से भी सप्तमी, अष्टमी, नवमी और दशमी को गैर-चिकित्सा कर्मचारियों (नॉन-मेडिकल स्टाफ) की संख्या 50 प्रतिशत रखी जाएगी। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टर और नर्सों के लिए ऐसा कोई ड्यूटी रोस्टर नहीं होगा। उन्हें अस्पताल की आवश्यकता और आपात स्थिति के अनुसार अपनी ड्यूटी पर उपस्थित रहना होगा और उनकी छुट्टियां पहले से तय नहीं की जाएंगी।
