कोलकाता, 21 अक्टूबर। पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की घटना की व्यापक और निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। राज्य के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा बुधवार जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार कलकत्ता उच्च न्यायालय के परामर्श से इस उच्च स्तरीय टीम का गठन किया गया है।
इस छह सदस्यीय विशेष जांच दल की अध्यक्षता कलकत्ता उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस अनिंदिता रॉय सरस्वती करेंगी। टीम के अन्य प्रमुख सदस्यों में राज्य के आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, विशेष कार्य बल के महानिदेशक, पुलिस महानिदेशक के प्रतिनिधि (जो अतिरिक्त महानिदेशक रैंक से कम न हों), गृह एवं पर्वतीय मामले विभाग के संयुक्त सचिव स्तर के प्रतिनिधि और कोलकाता में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल के एक प्रतिनिधि को शामिल किया गया है।
यह विशेष जांच दल भगदड़ के सटीक कारणों और घटनाओं के क्रम का गहराई से पता लगाएगा। जांच के दायरे में अत्यधिक भीड़, खराब मौसम का प्रभाव, प्रवेश और निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था, अफवाहें, बिजली की विफलता, संरचनात्मक खामियां और भीड़ नियंत्रण उपायों की संभावित विफलता जैसे अहम पहलू शामिल होंगे। इसके अलावा, दल यह भी जांचेगा कि आयोजन स्थल पर मौजूद लोगों की संख्या क्या सुरक्षित क्षमता से अधिक थी और क्या अनुमति देते समय राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों तथा निकासी योजनाओं का उचित पालन किया गया था।
इस जांच का एक मुख्य उद्देश्य आयोजकों, पुलिस अधिकारियों, कोलकाता नगर निगम, लोक निर्माण विभाग, अग्निशमन सेवा और सीईएससी जैसी एजेंसियों की ओर से हुई किसी भी संभावित लापरवाही, कर्तव्य में चूक या समन्वय की कमी को उजागर करना है। इसके साथ ही, विशेष जांच दल उत्तरी कोलकाता की संकरी गलियों में भविष्य में भारी दुर्गा पूजा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वैज्ञानिक उपायों, क्लोज सर्किट टेलीविजन निगरानी और आपातकालीन निकासी योजनाओं की सिफारिश भी करेगा।
जांच दल पीड़ितों और उनके परिवारों को दी गई सहायता, अनुग्रह राशि और पुनर्वास की पर्याप्तता की भी समीक्षा करेगा। राज्य सरकार ने विशेष जांच दल को अपनी विस्तृत जांच पूरी कर आदेश जारी होने की तारीख से तीन महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट, निष्कर्षों और सिफारिशों के साथ सौंपने का सख्त निर्देश दिया है ताकि कानून के अनुसार आगे की उचित कार्रवाई की जा सके।–
