कोलकाता, 20 अक्टूबर।
सोमवार यानी नवमी की रात राज्य और देश के अन्य हिस्सों से कोलकाता पहुंचे लोगों के लिए पूजा भ्रमण की आखिरी रात रही। दशमी की शुरुआत के साथ ही प्रतिमा विसर्जन का काम भी शुरू हो जाएगा। इस बार चोरबगान पूजा पंडाल में हुए दर्दनाक हादसे के कारण उत्सव के माहौल में शोक छा गया था और लोगों के उत्साह में थोड़ी कमी जरूर देखी गई। इसके बावजूद, पूजा भ्रमण की अंतिम रात होने के कारण राजधानी कोलकाता की सड़कों पर दर्शनार्थियों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा।
सोमवार को रात से ही लोगों की भीड़ बाकी दिनों की तुलना में ज्यादा थी, लेकिन रात के वक्त यह भीड़ पिछले सभी दिनों के मुकाबले काफी अधिक नजर आई। दरअसल, राजधानी में कमोबेश चार हजार से अधिक बड़े दुर्गा पूजा पंडाल बनाए गए हैं, जिन्हें षष्ठी, सप्तमी और अष्टमी, सिर्फ इन तीन दिनों के अंदर पूरा घूम पाना संभव नहीं है। इसलिए, जो लोग शुरुआत से ही पंडालों का भ्रमण कर रहे हैं, वे भी बचे हुए पंडालों के दर्शन के लिए नवमी की रात सड़कों पर निकले। इसके अलावा, जो लोग किन्हीं कारणों से पिछले तीन दिनों तक पूजा का आनंद नहीं ले सके थे, वे भी सोमवार रात राजधानी पहुंचे और एक के बाद एक पंडालों का भ्रमण किया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चोरबगान हादसे के बाद प्रशासन बेहद सतर्क है, फिर भी नवमी की रात होने के कारण सड़कों पर भारी भीड़ है। हावड़ा और सियालदह स्टेशन से बाहर निकले लोग बड़ी संख्या में सरकारी और प्राइवेट बसों का इस्तेमाल कर रहे हैं। बसें पूरी तरह से भरी हुई हैं और लोग अपने पसंदीदा पंडाल तक पहुंचने के लिए गेट पर लटक कर भी घंटों की यात्रा करने को मजबूर हैं।
यातायात के प्रमुख साधन मेट्रो में भी भीड़ का आलम यह है कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एंट्री और एग्जिट गेट को पूरी तरह से खोल दिया गया है और बैरियर हटा दिए गए हैं। कूपन सिस्टम के जरिए टिकट लेकर लोग धड़ल्ले से सबवे में पहुंच रहे हैं। भीड़ इतनी ज्यादा है कि दमदम से खुलने वाली मेट्रो में अंतिम स्टेशन कवि सुभाष तक जाते-जाते भी यात्रियों की भारी भीड़ जस की तस बनी रह रही है। प्रत्येक स्टेशन पर जितने लोग उतर रहे हैं, उससे कहीं अधिक चढ़ जा रहे हैं।
इसके साथ ही, हावड़ा और सियालदह से शिल्पांचल के शहरों की ओर चलने वाली लोकल ट्रेनें भी लोगों की भीड़ से खचाखच भरी हुई हैं। इन ट्रेनों में सोमवार सुबह 9:00 बजे से ही भीड़ का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह रात भर पूजा घूमकर लौटने वालों से जारी रहा।
