डांडिया-गरबा की मर्यादा बनाए रखने पर दिया जोर
पूर्वी सिंहभूम, 17 अक्टूबर । जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने धर्मांतरण के मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए इसे हिंदू धर्म के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। शनिवार को जारी बयान में सरयू राय ने कहा कि न्यायालय के इस फैसले के समर्थन में सभी लोगों को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। उन्होंने धर्मांतरण के जरिए निहित स्वार्थों की पूर्ति करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए फैसले के विभिन्न पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता जताई।
पत्रकारों से बातचीत में सरयू राय ने कहा कि धर्मांतरण के मुद्दे पर लंबे समय से प्रयास और आंदोलन होते रहे हैं। उनके अनुसार, संसद जिस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा सकी, उस दिशा में उच्चतम न्यायालय के फैसले ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने दावा किया कि धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को पहले धर्म से जुड़ी कुछ सुविधाओं का लाभ नहीं मिल सकेगा। हालांकि, इस संबंध में फैसले के वास्तविक कानूनी प्रभाव और दायरे को संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में समझना जरूरी है।
सरयू राय ने आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई और इस्लाम धर्म को मानने वालों की बढ़ती संख्या को लेकर सामने आने वाली चिंताओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने लोगों से धर्मांतरण के विषय में सजग रहने और अपनी धार्मिक परंपराओं के प्रति दृढ़ विश्वास बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि धर्म परिवर्तन के पीछे निजी लाभ हासिल करने का उद्देश्य है, तो संबंधित लोगों को अपने निर्णय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
नवरात्र के दौरान आयोजित होने वाले डांडिया और गरबा कार्यक्रमों पर अपनी राय रखते हुए सरयू राय ने कहा कि इनका संबंध मां दुर्गा की उपासना और धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं से है। ऐसे आयोजनों को केवल मनोरंजन का माध्यम बना देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जब डांडिया और गरबा का आयोजन धार्मिक आस्था एवं सांस्कृतिक परंपराओं के तहत किया जाता है, तो उनकी मूल भावना और मर्यादा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए।
विधायक ने आयोजकों से धार्मिक उत्सवों की परंपराओं और गरिमा को बनाए रखने की अपील की। साथ ही, प्रशासन से आग्रह किया कि डांडिया और गरबा जैसे कार्यक्रमों की अनुमति देते समय उनके धार्मिक स्वरूप और सामाजिक सद्भाव पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाए।—
